फरीदाबाद। अब तक जहां फरीदाबाद की पहचान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम राजा नाहर सिंह की वजह से होती रही है, वहीं अब जिले की पहचान खिलाड़ियों से होगी। यहां के कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के साथ ही ओलंपिक में नाम कमाया है।
फरीदाबाद के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। पहली बार ओलंपिक खेलों में जिले का कोई खिलाड़ी विजेता बना। हालांकि आंध्रप्रदेश मूल की भारतीय महिला खिलाड़ी कर्णम मल्लेश्वरी ने फरीदाबाद में रहते हुए ही वेटलिफ्टिंग में वर्ष 2000 में ओलंपिक में पदक अपने नाम किया था। मेडल जीतने पर उन्होंने जिले का जिक्र कर अपने संघर्ष के दिनों को याद किया था। हालांकि इस बार फरीदाबाद का नाम संघर्ष और खुशी के साथ पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले सिंहराज अधाना के साथ लिया गया। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि ओलंपिक में नाम दर्ज कराने के बाद अब जिले में खेल और खिलाड़ियों की पौध की झड़ी होगी।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के वर्तमान सदस्य व स्पोर्ट्स काउंसिल के पूर्व सचिव दीप भाटिया ने बताया कि जिले में खिलाड़ियों और प्रतिभा की कमी नहीं है। ओलंपिक में मेडल जीतने की दावेदारी फीकी पड़ी उसकी क्षतिपूर्ति इस बार पैरालंपिक खिलाड़ी सिंहराज अधाना ने पूरी की। पूर्व में हरियाणा का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम जिले में था। सिर्फ इस सुविधा के बूते इसे क्रिकेट से जोड़कर देखा जाता रहा, जबकि खिलाड़ी सिर्फ क्रिकेट के नहीं अन्य विधाओं के भी उभरे। दिल्ली के नजदीक होने और स्टेडियम सुविधाएं होने के कारण अब स्कोप बढ़ा है। नए स्टेडियमों में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पनपेंगे। ज्यादातर शूटिंग खिलाड़ी फरीदाबाद से ही निकले हैं। हॉकी के लिए एस्ट्रो टर्फ का मैदान सेक्टर-12 में बनाया गया है। फुटबॉल और बैडमिंटन का स्कोप बढ़ रहा है। तैराकी की संभावनाएं भी युवाओं के साथ बढ़ रही हैं। यही प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की छवि को निखारेंगी।
गांव अटाली के ध्यानचंद अवॉर्डी व दो बार के एशियन गेम्स विजेता भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि जिले में पहली बार किसी खिलाड़ी ने ओलंपिक स्तर पर पदक जीता। इस बात की खुशी है। यही संभावनाओं का विस्तार है। एशियन गेम खेलने पर राज्य सरकार ने उनके गांव को मॉडल विलेज कहकर सम्मानित किया। इसी तरह अधाना के गांव में भी शूटिंग रेंज बनवाकर भावी खिलाड़ियों को योगदान दे सकते हैं।
पूर्व पैराएशियन गेम्स में मनीष नरवाल ने गोल्ड जीता था। हालांकि मंगलवार को पैरालंपिक विधा में उन्हें हार देखनी पड़ी। पदक ओलंपिक में हो या पैरालंपिक में हो, प्रोत्साहन हर वर्ग के खिला ड़ियों को मिलता है।