फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में बुधवार को सफाई कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे तो ऑपरेशन टालने की नौबत आ गई। प्रसव कक्ष में बगैर सफाई के ही डिलीवरी कराई गई। आंख, कान सहित पथरी व अन्य ऑपरेशन टालने पड़े। लोग ऑपरेशन थियेटर के बाहर इंतजार करते रहे। आखिरकार डॉक्टरों को ही यह कहने के लिए बाहर आना पड़ा कि सफाई कर्मचारी काम पर नहीं हैं। इस कारण डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर सकते।
बुधवार से बीके नागरिक अस्पताल में 200 से अधिक अनुबंधित कर्मचारी अपनी मांग मनवाने के लिए हड़ताल पर चले गए। इनमें सफाई कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, ड्राइवर, लैब टेक्नीशियन, फायर मैन, डेटा ऑपरेटर, डॉक्टर के सहायक, माली व बेलदार शामिल हैं।
हड़ताल से सबसे अधिक परेशानी ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को रही। मरीज नियम अनुसार तय तारीख पर ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे। वहां जाकर पता चला कि संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं, ऐसे में मरीजों ने स्वयं लाइन लगाई और अपनी बारी का इंतजार करना शुरू कर दिया। मरीज ऑपरेशन के लिए थियेटर के बाहर ही जमा हो गए तो आखिर में डॉक्टर ही बाहर आकर बोले कि सफाई कर्मचारियों के अभाव में ऑपरेशन टालने पड़ेंगे। केवल एक महिला की आपात डिलीवरी ऑपरेशन के जरिये कराई गई।
जच्चा-बच्चा के बेड पर पसर गए पुरुष
अस्पताल में प्रसव के बाद बच्चों को स्तनपान कराने वाली जच्चा के बिस्तर पर पुरुष पसर गए। जच्चा कक्ष में पुरुषों के प्रवेश पर अंकुश लगाने वाले सुरक्षाकर्मी भी बुधवार को काम पर नहीं आए। अनुबंधित कर्मियों की हड़ताल के कारण यह सभी कर्मचारी धरने पर बैठे रहे। अस्पताल परिसर में ही एक ओर सभी कर्मचारी अपनी मांग मनवाने के लिए धूप में जूझते रहे। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन कर्मचारियों के अभाव में मुश्किलों के साथ व्यवस्था बनाने में जुटा रहा। इस बीच अस्पताल में प्रसव कक्ष में भी पुरुष जा घुसे। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों की भागदौड़ दोगुनी हो गई। एक ओर व्यवस्था संभालने का जिम्मा और दूसरी ओर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दौड़भाग रही।
मरीजों की प्रक्रिया
पत्थरी का ऑपरेशन होना था। अस्पताल में बुधवार की तारीख मिली थी। समय अनुसार ऑपरेशन के लिए पहुंचा था। जानकारी मिली कि ठेका कर्मियों संग सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में बगैर सफाई के ऑपरेशन करना संभव नहीं। डॉक्टर ने कुछ दिन बाद आकर ऑपरेशन की तारीख लेने की बात कही है।
- देवा नारायण, मरीज
बेटे को देखने में काफी दिन से परेशानी है। उसकी आंख का मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है। कई माह चक्कर काटने के बाद बुधवार को ऑपरेशन की तारीख मिली थी। अब ऑपरेशन के लिए फिर से इनकार कर दिया। पता नहीं हड़ताल कब तक चलेगी।
- राजेंद्र, तीमारदार
पोर्टल पर नाम नहीं आने से नौकरी पर संकट बना
बीके अस्पताल ठेका कर्मचारी यूनियन के प्रधान सोनू सोया ने बताया कि सरकार ने ठेका कर्मचारियों के लिए कौशल रोजगार निगम बनाया है। इसके लिए बनाए गए पोर्टल में कई तरह की खामियां हैं। बहुत से कर्मचारी हैं, जिन्हें काम करते हुए आठ से 10 साल हो गए बावजूद इसके उनका पद ही समाप्त कर दिया गया। बहुत से कर्मचारियों के नाम पोर्टल पर नहीं आने से उनकी नौकरी पर संकट बन गया है। निगम के तहत कर्मचारियों को अनुभव व योग्यता के अनुसार वेतन दिया जाना है। कर्मचारी 15-18 साल से नौकरी करने के बावजूद निम्न कौशल वाले स्केल में रखा गया। पुराने रिकॉर्ड को इसमें कोई तवज्जो नहीं दी गई।
हड़ताल पर गए कर्मचारियों के स्थान पर व्यवस्था संभालने के लिए अन्य कर्मचारी लगाए गए। सफाई कर्मचारियों की काफी कमी है। परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में बगैर सफाई कर्मियों के काम मुश्किल हो रहा है। हालांकि अपने स्तर पर फौरी इंतजाम किए गए।
- डॉ. सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी