फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में शनिवार को अजब-गजब माहौल देखने को मिला। दिमाग के मरीज बाल रोग विशेषज्ञ के पास इलाज के लिए पहुंच गए। दूसरी ओर बच्चों को दिखाने के लिए तीमारदार दिमाग के डॉक्टर (मनोरोग चिकित्सक) के पास पहुंच गए। दोनों विभाग की ओपीडी में मरीज कई घंटे तक इलाज का इंतजार करते रहे। कई मरीजों को इंतजार करते-करते इतना समय लग गया कि ओपीडी का समय ही बीत गया और रोगी बगैर इलाज ही घर लौट गए। यह परेशानी दिमाग के डॉक्टर और बाल रोग विशेषज्ञों के कमरों की अदला बदली के कारण हुई। उधर, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ न होने के कारण ज्यादातर मरीज निजी खर्च पर जांच करवाने के लिए मजबूर नजर आए।
बीके अस्पताल के कुप्रबंधन के कारण शनिवार को कई मरीज बगैर डॉक्टर को बिना दिखाए ही वापस लौट गए। बच्चों की जांच कराने के लिए आए तीमारदार इस कदर परेशान हुए कि करीब दो घंटे तक खाली कुर्सियों के सामने बैठकर डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। इसके बावजूद उनके नौनिहालों की जांच न हो सकी। आखिर थक हारकर मरीजों ने ओपीडी में बैठने वाली बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या की खोज शुरू की। एनआईटी-5 निवासी भावना ने बताया कि वह बीके अस्पताल के प्रथम तल पर मौजूद जच्चा-बच्चा वार्ड व स्पेशल न्यू बॉर्न यूनिट में बाल रोग विशेषज्ञ को ढूंढने पहुंची। करीब दो घंटे की दौड़ भाग के बाद मरीजों को बताया गया कि केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ ही शनिवार को सेवारत है। वह ओपीडी के कमरा नंबर एक में सेवाएं दे रही हैं। वहीं, पूर्व में ओपीडी के कमरा नंबर तीन में सेवाएं देती थीं। शनिवार को उनके कमरे बदल दिए गए। इस कारण तीमारदार कमरा नंबर तीन के बाहर ही बच्चों को लेकर इंतजार करते रहे। कई मरीज इस भागदौड़ में अपने बच्चों को डॉक्टर को दिखाए बगैर ही वापस लौट गए। उधर, दिमाग के डॉक्टर को दिखाने के लिए आए मरीजों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ज्यादातर मरीज बाल रोग विशेषज्ञ के कमरे में अपने इलाज के लिए पहुंच गए।
निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड करा रहे रोगी
बीके नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए डॉक्टर ही नहीं है। ऐसे में पदोन्नति हो चुके डॉ. सुशील अहलावत केवल गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन के आग्रह पर वह सप्ताह में तीन दिन केवल दो से तीन घंटों के लिए ही सेवाएं दे रहे हैं। अन्य मरीजों की जांच ही नहीं की जा रही है। इस कारण ज्यादातर मरीज अस्पताल की सेवाओं को राम भरोसे बता रहे हैं। शनिवार को पेट में गांठ की समस्या लेकर अस्पताल में जांच कराने पहुंचे हरिसिंह को डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा, लेकिन उनकी जांच नहीं की गई।
तीमारदारों को नहीं मिल रहीं दवाएं
जवाहर कॉलोनी निवासी हेमलता ने बताया कि उनके छह माह के बच्चे को तीन दिन से बुखार है। वह जुकाम से पीड़ित है। शनिवार को बड़ी मुश्किल से कई घंटों बाद बाल रोग विशेषज्ञ को दिखा सकी। इसके बाद परामर्श में लिखी गई दवाएं नहीं मिलीं। निजी खरीद पर दवाएं लेनी पड़ी। अस्पताल में केवल बुखार खांसी की दवाएं ही मरीजों को मिल रही हैं।
दिमाग में सूजन और दर्द रहता है। इसके लिए दिमाग के डॉक्टर के पास उपचार के लिए आई। यहां तीन लाइन में लगने के बाद पता चला कि यह लाइन बाल रोग विशेषज्ञ के लिए लगाई गई थी। उधर, दोबारा दिमाग के डॉक्टर की लाइन में लगाने की हिम्मत नहीं रही। - रोमा, डबुआ निवासी
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बच्चे के इलाज के लिए बीके अस्पताल पहुंची। यहां न तो अल्ट्रासाउंड हुआ और न ही समय से ओपीडी कमरे का कुछ समझ आया। पूरा दिन लगाने के बाद बगैर इलाज जाना बेहद दुखद अनुभव रहा। - प्रीति, सेक्टर-23
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मुस्कान परियोजना के तहत बाल रोग ओपीडी में अधिक जगह चाहिए। इस कारण जरूरी सुविधाएं देने के लिए डॉक्टर कक्ष की अदला-बदली की गई। मरीजों को इससे सुविधा ही मिलेगी। अल्ट्रासाउंड कक्ष के लिए स्पेशलिस्ट की मांग भेजी गई है। - डॉ सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी