फोटो 10,11 में हैं।
कैप्शन: 10- शेल्टर होम का फाइल फोटो
कैप्शन: 11 दीपक मंगला, विधायक पलवल
- योजना तैयार की फाइल भेजी थी चंडीगढ़, लेकिन आज तक मंजूर होकर नहीं आई
- 47 लाख रुपये में बनना था शेल्टर होम
अनूप पाराशर
पलवल। सरकार की नगर परिषद की जमीन पर शेल्टर फॉर होमलैस निर्माण की योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। करीब 15 साल पहले बनाई गई योजना को अमलीजामा पहनाने की तरफ न तो पहले कांग्रेस सरकार ने काम किया और न ही उसके बाद भाजपा सरकार द्वारा इस पर ध्यान दिया गया। योजना बनाने के बाद ठंडे बस्ते में डालना पहली बार नहीं है, बल्कि ऐसी कई योजनाएं हैं, जिन्हें बनाने के बाद सरकार ने पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया।
आज से 15 साल पहले पलवल में शेल्टर फॉर होमलैस निर्माण की योजना तैयार की गई थी। इस योजना की पूरी फाइल तैयार कर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के निदेशक के पास चंंडीगढ़ भेजी गई, ताकि वहां से मंजूरी मिलते ही पलवल नगर परिषद सीमा में योजना के तहत काम शुरू हो जाए और योजना का लाभ गरीब लोगों को मिल सके, लेकिन चंडीगढ़ मुख्यालय फाइल ऐसी गई कि वहीं गुम होकर रह गई। उसके बाद किसी ने उस फाइल की सुध नहीं ली।
9900 वर्ग गज जमीन का किया गया था चयन
शेल्टर फॉर होमलैस निर्माण के लिए रेलवे लाइन पार कैलाश नगर में नगर परिषद की तरफ से 9900 वर्ग गज जमीन चयनित की गई थी। योजना के तहत इस 9900 वर्ग गज जमीन में से 3100 वर्ग गज जमीन में शेल्टर का निर्माण होना था, जबकि बाकी जमीन खाली रखनी थी। शेल्टर में 63 लोगों के रहने की व्यवस्था की जानी थी। निर्माणाधीन भवन में तीन टायॅलेट, एक रसोई, एक बड़ा हॉल, एक स्टोर रूम भी बनाया जाना था। इसके अलावा शेल्टर हाउस की देखरेख करने वाले प्रबंधक के लिए भी एक कमरा बनना था। इस पर उस समय करीब 47 लाख रुपये की लागत आनी थी। इस सब का एस्टीमेट तैयार कर शहरी आजीविका मिशन के पास भेज दिया गया था।
कौन लोग रह सकते हैं शेल्टर में
शेल्टर फॉर होमलैस में रात बिताने वाले लोगों के अलावा कई-कई दिनों तक परिवार सहित बेघर लोग रह सकते हैं। ऐसे लोग भी शेल्टर होम में रह सकते हैं, जो अस्पताल में भर्ती थे तथा उपचार के बाद छुट्टी मिलने पर किसी कारणवश या कमजोरी के चलते घर नहीं जा सकते। परीक्षा देने के लिए दूर-दराज से आने वाले परीक्षार्थी तथा बाहर से किसी कार्य से आने वाले लोग भी शेल्टर होम में रह सकते हैं।
पांच रुपये लिया जाना था शुल्क
शेल्टर होम में रहने वाले लोगों से पांच रुपये किराया वसूलने का निर्णय लिया गया था। लेकिन जिला प्रशासन शेल्टर होम का ही आज तक निर्माण ही नहीं करा पाया तो लोग कहां ठहर पाते। शेल्टर होम के निर्माण से हर वर्ष सर्दियों के मौसम में जिला प्रशासन व रेडक्राॅस सोसायटी द्वारा बनाए जाने वाले रैन बसेरों की भी जरूरत नहीं पड़ती।
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। मैं इस बारे में जिला प्रशासन से बात करूंगा तथा संबंधित अधिकारियों से शेल्टर होम के बारे में जानकारी लूंगा। यदि ऐसी कोई व्यवस्था बन सकती है और नगर परिषद की जमीन पर शेल्टर होम बनाया जा सकता है तो मुख्यमंत्री से मिलकर इस योजना को सिरे चढ़वाने का पूरा प्रयास करूंगा। मेरा प्रयास रहता है कि आम व गरीब लोगों को किसी भी तरह से सहारा व सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके।
-दीपक मंगला, विधायक पलवल