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खोरी गांव के लोगों की टूटी आस, खुद खाली करने लगे मकान

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फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खोरी वासियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने तोड़फोड़ कार्रवाई रोकने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद लोग अपने घरों को खाली करने के जाने लगे है। शनिवार को अनेक लोगों ने अपने मकानों को खाली किया। कई लोग अपने गांव वापस लौट रहे हैं। इस दौरान लोगों के चेहरों में मायूसी और निराशा साफ देखने को मिल रही थी।
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अरावली वन क्षेत्र में बसे खोरी गांव में तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर पिछले दिनों खोरी गांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के याचिका दायर की गई थी। इस याचिका के माध्यम से लोगों ने कोर्ट से गांव में तोड़फोड़ कार्रवाई रोकने की मांग की। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग का भी हवाला दिया गया। वहीं नगर निगम ने तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद तोड़फोड़ कार्रवाई रोकने से इनकार कर दिया और चार सप्ताह में कार्रवाई पूरी करने के लिए निगम को निर्देश दिए। कोर्ट का फैसला सुनते ही लोगों की आस टूट गई, क्योंकि लोगों को उम्मीद थी कि उनकी दलील सुनने के बाद शायद कार्रवाई पर रोक लग जाए। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। लोगों का कहना हैं कि सरकार ने उन्हें बसाया नहीं और उजाड़ना शुरू कर दिया। बारिश के मौसम में उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। खुले में रह नहीं सकते और किराए के मकान लेने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है।
लोगों से बातचीत
हमें उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट मानवीय पहलुओं को देखते हुए तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगाएगा। लेकिन, निराशा हाथ लगी। इस कारण से घर खाली करके किराये के मकान में जाना पड़ रहा है। प्रॉपर्टी डीलरों ने उन लोगों के साथ धोखा किया है। - आरपी सिंह, स्थानीय निवासी
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सरकार से निराशा हाथ लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक अंतिम आस थी। वह भी टूट गई। लेकिन, खुशी इस बात की है कि गरीबों के मकान टूटने के साथ ही अमीरों के फार्म हाउस भी तोड़े जाएंगे। सरकार गरीबों को आवास उपलब्ध कराए। - सपना गुप्ता, स्थानीय निवासी
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