राजस्थान के लक्ष्मी लाल कुमार मिट्टी के बर्तन लेकर मेले में पहुंचे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सूरजकुंड मेले में मिट्टी के बर्तन, सजावटी वस्तुएं और लोक कलाएं विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। राजस्थान की मिट्टी के बर्तन और अन्य सजावटी सामान मेले की शान बढ़ा रहे हैं। लोगों को सबसे ज्यादा जादुई दीपक पसंद आ रहा है। गेट नंबर 2 पर स्टॉल संचालक राजस्थान के राजसमंद के गांव मोलेला से आए लक्ष्मी लाल कुमार और सहायक राजकुमार ने बताया कि यह उनकी पुश्तैनी कला है और वह 2009 से मेले में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थानी कुम्हार पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों का उपयोग करते हैं, इसलिए उनके बनाए बर्तन मजबूत, पर्यावरण-अनुकूल और उपयोगी होते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान पर मिट्टी से बने 200 से अधिक सामान उपलब्ध हैं। दुकान पर जादुई दीपक भी उपलब्ध है, जिसको देखकर पर्यटक आश्चर्यचकित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दीपक के अंदर एक कीप जैसी संरचना होती है। जब इसे उल्टा करके नीचे के छेद से तेल डाला जाता है, तो तेल एक आंतरिक कक्ष में जमा हो जाता है। वापस सीधा करने पर, हवा के दबाव और पाइप की बनावट के कारण तेल बाहर नहीं निकलता, बल्कि केवल बाती के जरिये ही बाहर आता है। इसलिए दीपक को जादुई कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि उनके पास रंग-बिरंगे घड़े, सुराही, दीये, पानी की बोतल, फूलदान और कलात्मक प्लेटें और चिकनी और काली मिट्टी से निर्मित अन्य सामान सहज ही पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर रही हैं। इन सामान और बर्तनों पर पारंपरिक राजस्थानी डिजाइन और चमकीले रंग बनाए जाते हैं, जो राज्य की समृद्ध संस्कृति को दर्शाते हैं।