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Faridabad News: एनआईटी बना प्रदूषण का हॉट स्पॉट, 306 रहा एक्यूआई

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दमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। फरीदाबाद में सड़कों पर उड़ती धूल प्रदूषण बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। वाहनों की रफ्तार से सड़कों पर उड़ती धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं, इसके बावजूद कई सड़कों पर उड़ती धूल दावों की पोल खोल रही है। रविवार को फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 222 बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। धुंध छाने से पूरे दिन दृश्यता काफी कम रही। वहीं, बल्लभगढ़ का एक्यूआई 168 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में रहा। इसके अलावा एनआईटी प्रदूषण का हॉट स्पॉट रहा। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक सबसे अधिक 306 रहा। इस दौरान दमा के मरीजों को सांस लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि सेक्टर- 16 का एक्यूआई 220 व सेक्टर- 30 का 184, और सेक्चर- 11 का 180 दर्ज किया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम भले ही उड़ती धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़कव कर रहा है लेकिन उसका कुछ खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं, रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्यिस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्यिस दर्ज किया गया।
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निगम के पास सड़कों को साफ करने वाली मशीनों की कमी
नगर निगम प्रशासन के पास सड़कों की सफाई के लिए मात्र छह मशीनें हैं। विभाग के पास वाहन से लैस दो एंटी स्मॉग गन हैं, जबकि पांच एंटी स्मॉग गन स्थायी हैं। ये सार्वजनिक स्थानों पर लगाई हुई हैं। वहीं, करीब 14 टैंकर हैं। जबकि शहर में नगर निगम के 46 वार्ड हैं। एनआईटी- 5 निवासी पंकज शर्मा ने बताया कि शहर की सड़कों पर उड़ती धूल को रोकने के लिए उपरोक्त संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। जिले के पास एक स्वीपिंग मशीन है। इससे एक दिन सड़क साफ कराने पर निगम को लाखों रुपये खर्च करना पड़ता है। इसके बाद भी सड़क किनारे धूल जमी होती है और वाहनों के आवागमन पर धूल का गुब्बार उड़ता है। इससे वाहन चालकों को कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता और कई बार लोग हादसे का शिकार हो जाते है। नगर निगम ने विभिन्न वार्डों में कूड़े में आग लगाने वालों पर लगाम लगाने के लिए 70 लोगों की एक टीम गठित है। जो खुले में कूड़ा जलाने पर लोगों के चालान काट रही हैं। वहीं, नगर निगम के मुख्य अभियंता बीरेंद्र कर्दम का कहना है कि प्रदूषण बढ़ेगा तो निगम प्रशासन को निजी कंपनी की मदद लेकर संसाधनों की संख्या बढ़ानी होगी। तभी बेहतर ढंग से धूल उड़ने पर रोक लगाई जा सकती है।
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