साल 2017 में चुनावी रंजिश के चलते हुए बहुचर्चित पलवली हत्याकांड मामले में सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके शर्मा की अदालत ने नौ आरोपियों को दोषी करार दिया है। बाकी 17 को बरी कर दिया है। मामले में एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है। केस में एक आरोपी नाबालिग था, उसे अदालत ने बरी कर दिया। दोषियों को 26 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।
17 सितंबर 2017 की शाम पलवली की सरपंच दयावती के पति वीरेंद्र उर्फ बिल्लू के बेटे मिरिंडा और चुनाव में प्रतिद्वंद्वी बिजेंद्र के समर्थक कन्हैया के बीच झगड़ा हो गया था। चुनावी रंजिश के चलते बिल्लू परिवार के लोग राइफल और बंदूक लेकर पहुंच गए। गोलीबारी में श्रीचंद, राजेंद्र, ईश्वर, नवीन और देवेंद्र की मौत हो गई थी, जबकि नितेश, कन्हैया, ललित गौड़, सुरेश, परमाली और भगतराम घायल हो हुए थे। हत्याकांड में दयावती, वीरेंद्र, गुरुग्राम में तैनात एएसआई धर्मेंद्र, एक नाबालिग समेत 28 लोगों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था।
दिसंबर 2017 में एसआईटी की टीम ने अदालत में दाखिल की चार्जशीट में वीरेंद्र, नरेंद्र, धर्मेंद्र, लीलू व सुभाष को मुख्य आरोपी बनाया था। आरोपी नंदकिशोर की बीमारी के चलते जेल में मौत हो गई थी। सोमवार को अदालत ने मामले में नामजद कमल किशोर को धारा 302 और आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया। आरोपी नरेंद्र, धर्मेंद्र को जानलेवा हमला करने, आर्म्स एक्ट , अमित को धारा 324 और आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है। आरोपी रविंद्र, रविकांत, हरीश, सतीश और लोकी को धारा 323 में दोषी करार दिया।
आरोपी ज्ञानचंद, शिवकांत, विनय, राजेंद्र प्रसाद, मौजीराम, ओमवती, दयावती, सागर, श्रीकांत, हरकेश, मनोज, वीरेंद्र उर्फ बिल्लू, ओमदत्त, श्रीराम, प्रमोद, सुभाष और चमन को सबूतों को अभाव में बरी कर दिया। दोषियों को 26 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।