ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद को जोड़ने वाले मंझावली पुल के निर्माण के लिए माइनिंग विभाग ने अनापत्ति (नो ऑब्जेक्शन) जारी नहीं की है। ऐसे में पुल का काम लटक गया है। इस मामले में जिला उपायुक्त भी पत्र जारी कर काम की अटकलें खत्म करने की सिफारिश कर चुके हैं। पूर्व में पुल निर्माण में जुटी कंपनी भी माइनिंग विभाग को 10 से अधिक पत्राचार कर चुकी है। बावजूद इसके इस बारे में कोई प्रतिक्रिया विभाग ने नहीं दी है। वहीं, दूसरी ओर निर्माण कार्य में जुटी कंपनी भी बीते एक साल से निर्माण की एवज में भुगतान न होने से परेशान है।
मंझावली पुल ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद को आपस में जोड़ने का काम करेगा। निर्माण पूरा करने के लिए इस वर्ष की जून माह की अवधि निर्धारित की गई है। इसमें एक साथ कई दिक्कतें सामने आ रही हैं। यमुना का पानी गांवों में प्रवेश न करे, इसके लिए यमुना के किनारे पर गाइड बंद का कार्य किया जाना है। इसके लिए माइनिंग विभाग की तरफ से मिट्टी लेने की अनुमति नहीं मिल रही। इससे पुल निर्माण में रुकावट आ गई है। बता दें यह पुल केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
यह है योजना
मंझावली से खेड़ी पुल की तरफ आने वाली सड़क की चौड़ाई को बढ़ाया जाना है। वहीं गांव मंझावली और चीरसी में बाईपास सड़क बनाई जाएगी। पुल की कनेक्टिविटी के लिए लगभग 24 किलोमीटर लंबी परियोजना पर काम हो रहा है। इसके तहत 19 किलोमीटर सड़क हरियाणा और 5 किलोमीटर सड़क उत्तर प्रदेश में बनाई जानी हैं। मंझावली गांव में यमुना नदी पर 600 मीटर लंबा फोर लेन पुल बनाया जाना है। पुल निर्माण के बाद ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद की दूरी मिनटों की रह जाएगी। फिलहाल ग्रेटर नोएडा पहुंचने में दो घंटे का समय लगता है। अब तक इस पुल का लगभग 40 से 50 प्रतिशत कार्य हो चुका है।
कब क्या हुआ
मंझावली में पुल निर्माण की आधारशिला 15 अगस्त 2014 को रखी गई थी। पुल निर्माण पर लगभग 120 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह पुल शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। सभी जून तक पुल के आवागमन के लिए चालू होने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि धरातल पर अब भी कई मुसीबतें सामने आ रही हैं।