फरीदाबाद। रोहतक में दिहाड़ी मजदूरी करके पेट पाल रहे थे, मगर अब न पैसा धेला बचा और न ही कुछ खाने को मिल रहा है। हालत खराब होने लगी तो बच्चों को लेकर झांसी अपने गांव जाने के लिए निकल पड़े। साहब, चार दिन से पैदल चल रहे हैं। रास्ते में कहीं कोई खाने को दे देता है तो खा लेते हैं नहीं तो पानी पीकर ही चल रहे हैं। राजमार्ग पर पुलिस कर्मियों द्वारा रोके जाने पर मजदूरों ने बताई अपनी व्यथा।
मूलरूप से झांसी के गांव जारबो निवासी बबलू और विमल ने बताया कि वे पिछले 5-6 साल रोहतक में रह रहे थे लेकिन लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद हो गया तो कामधंधा छूट गया। थोड़ी बहुत जमापूंजी थी, जिससे रोटी का जुगाड़ चल रहा था। अब पैसे भी खत्म हो गए और कहीं से मदद भी नहीं मिल रही थी। बच्चों को कब तक भूखा रखते, ऐसे में गांव जाना ही सही लगा। कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए। इन प्रवासी मजदूरों को बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित एनएचपीसी चौक पर पुलिसकर्मियों ने रोक लिया। साथ ही उनके लिए खाने की व्यवस्था भी कर दी, मगर वे बार-बार घर जाने देने की गुहार लगा रहे थे। पुलिसकर्मी उच्च अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें शेल्टर होम या फिर वापस भिजवाने की व्यवस्था कर रहे हैं।