इसके लिए बाकायदा 75 ट्रांसपोर्टर्स की लिस्ट तैयार की गई थी, जो दो नंबर की थी। इसमें गुटका, पान मसाला वाले करीब पांच लाख रुपये महीना रिश्वत देते थे, किराना वाले करीब डेढ़ लाख रुपये, स्क्रैप से जुड़े ट्रांसपोर्टर करीब पांच लाख रुपये, सुपारी और तांबा वाले ट्रांसपोर्टर्स सात से आठ लाख रुपये देते थे।
इस तरह हर माह करीब 4.50 करोड़ रुपये की उगाही की जाती थी। इसमें से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये तीन अधिकारियों में बंटते थे। बाकी ठेकेदार खुद रखता था। ठेकेदार ही लिस्ट में शामिल गाड़ियों को ही बॉर्डर तक पास कराते थे। ट्रांसपोर्टरों से वसूली गई रकम को ये ठेकेदार अधिकारियों तक पहुंचाते थे। एसीबी अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने में जुटी है।
अमरीश चौधरी ने बताया कि दो साल पहले ठेकेदारों ने उनके रिश्तेदार की गाड़ी को रोड साइड जांच के दौरान पकड़ लिया था। उनसे मंथली बांधने और रिश्वत देने की बात करने लगे। उनके इन्कार करने पर ठेकेदार के इशारे पर अधिकारियों ने गाड़ी को कब्जे में ले लिया और पांच दिन तक कब्जे में रखा, पैसों की डिमांड करते रहे। अंत में पैसे नहीं मिलने पर छोड़ दिया।
दिल्ली से लोड गाड़ियों को होडल तक कराते थे पास
सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद जब व्यापारियों पर शिकंजा कसना शुरू हुआ तो उसमें आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी अवसर तलाशने लगे। दिल्ली स्थित ट्रांसपोर्ट नगर, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर और लाहौरी गेट से सैकड़ों की संख्या में ट्रकों में परचून और पान मसाला आदि का सामान लोड होता था। इन ट्रकों को बिना किसी रोक टोक के होडल बार्डर तक पास कराने का ठेका गाजियाबाद और पलवल के दो ट्रांसपोर्टर लेते थे। जो भी गाड़ियां दिल्ली से निकलती थीं, उन ट्रांसपोर्टरों की लिस्ट फरीदाबाद और पलवल में चेकिंग करने वाले आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों के पास होती थी। चेकिंग करने वाले अधिकारी लिस्ट के अनुसार गाड़ियों को बिना चेकिंग के ही आगे जाने देते थे।