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Faridabad News: कितनी प्रदूषित हुई यमुना, क्लॉक वाइस होगी मॉनिटरिंग

Mon, 01 Apr 2024 03:07 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
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रियल टाइम मॉनिटरिंग क्वालिटी सिस्टम लगाया जाएगा, केमिकल डालने वाली कंपनियों के कटेंगे चालान
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रति घंटे निगरानी (क्लॉक वाइस मॉनिटरिंग) करेगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों और आवासीय सेक्टरों से यमुना में छोड़े जाने वाले पानी पर नजर रखी जा सकेगी। पूरे हरियाणा में फरीदाबाद समेत पांच जिलों में यमुना नदी और घग्गर नदी में यह सिस्टम मई-2024 तक लगाए जाएंगे। इस सिस्टम की सहायता से प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को पता चल जाएगा कि पानी की गुणवत्ता कैसी है। इसके अलावा नदी के जल में कौन-कौन से कण मौजूद हैं, जिससे जल दूषित हो रहा है। इस कदम से यमुना में केमिकल डालने वाली कंपनियों के चालान काटे जा सकेंगे।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में घर, सेक्टर और उद्योगों से निकलने वाला इस्तेमाल किया हुआ पानी, सीवरेज आदि शहर के चार सीवर शोधन संयंत्र में शोधित किए जाने के बाद बुढ़िया नाले के जरिये यमुना नदी में छोड़ा जाता है। यमुना के आसपास लगे उद्योगों और कॉलोनियों का प्रदूषित पानी बिना शोधित किए यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है। इससे यमुना का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान यमुना का पानी इस कदर साफ हो गया था कि लोग यमुना में सुबह शाम स्नान करने लगे थे, लेकिन लॉकडाउन के खुलने के बाद अब फिर से यमुना दूषित होनी शुरू हो गई है।
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यमुना में उद्योगों का दूषित पानी बिना शोधित किए डाला जा रहा है। निगरानी न होने पर स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। वहीं, शहरों से निकलने वाले सीवर के पानी को बिना शोधित किये ही यमुना में डाला जा रहा है। यमुना रक्षक दल से मिली जानकारी के अनुसार यमुना निगरानी कमेटी ने एनजीटी को एक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में हरियाणा के 10 जिलों में हर रोज 1164 एमएलडी सीवर का पानी निकलता है। एसटीपी के सही तरीके से कार्य न करने के चलते 521 एमएलडी पानी बिना ट्रीट किये ही यमुना में डाला जा रहा है, जिससे यमुना दूषित हो रही है। फरीदाबाद में 220 एमएलडी सीवर का पानी निकलता है। 220 एमएलडी में से केवल 10 एमएलडी पानी ही शोधित हो पाता है। बाकी 210 एमएलडी पानी बिना शोधित किये ही यमुना में डाला जा रहा है। यमुना के पानी में कौन-कौन से घातक कण मौजूद है, इसका पता लगा पानी काफी मुश्किल है। इसलिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मॉनिटरिंग सिस्टम को लगा रहा है।
पांच जिलों में लगाया जाएगा मॉनिटरिंग सिस्टम
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नेशनल वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग कार्यक्रम चलाया गया है, जिसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहायता से मॉनिटरिंग की जाती है। इसी कार्यक्रम के तहत ही प्रदेश के पांच जिले यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद में वाटर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा। हरियाणा से दो नदियां निकल रही हैं, जिसमें घग्गर और यमुना प्रमुख है। फरीदाबाद में इस वक्त 32 प्रदूषण फैलाने वाली यूनिटें है, जिनका पानी सीधा यमुना में जाता है। इस कारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पता लगाने में आसानी होगी कि पानी में बीओडी, सीओडी और नाइट्रोजन के कण कितनी मात्रा में तैर रहे हैं। इसमें हर एक घंटे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यमुना में प्रदूषित पानी छोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी।
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प्रत्येक घंटे जल की गुणवत्ता की मिलेगी जानकारी
यमुना नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। रियल टाइम मॉनिटरिंग क्वालिटी सिस्टम लगाने का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। इससे यमुना का पानी कितना प्रदूषित हो रही है। इसकी हर घंटे जानकारी मिल सकेगी।
- संदीप सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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