फरीदाबाद ( कैलाश गठवाल)। शहर में हो रहे हिट एंड रन केसों की जांच की फाइल दोबारा से वहीं आ गई हैं, जहां से शुरू हुई थी। ट्रैफिक पुलिस ने करीब डेढ़ महीने तक अपने पास रखने के बाद सभी फाइलों को वापिस उनके संबंधित थानों में भेज दिया है। दरअसल पूर्व पुलिस आयुक्त ओपी सिंह ने हिट एंड रन केसों के निपटारे को लेकर एक नया प्रयोग किया था। उन्होंने ट्रैफिक के जुड़े केसों, खासकर हिट एंड रन और एक्सीडेंट के दौरान मौत जैसे मामलों की जांच ट्रैफिक पुलिस से कराने का निर्णय लिया था। ये अपनी तरह का हरियाणा का पहला मामला था, जब केस की जांच ट्रैफिक पुलिस द्वारा कराई जाए।
ओपी सिंह के आदेश के बाद अलग-अलग थानों से 27 फाइल ट्रैफिक थानों में भेज दी गई। ये केस साल 2021 के थे। केसों की जांच के लिए दस जांच अधिकारी भी बना दिए गए थे, लेकिन केसों की जांच करना ट्रैफिक पुलिस के बस की बात ही नहीं थी। नए पुलिस आयुक्त के आने के बाद से ही ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने पुरानी योजना को खत्म करने का मन बना लिया था। ट्रैफिक पुलिस के साथ पुलिस आयुक्त की मीटिंग में ही अधिकारियों ने अपनी समस्या पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा के सामने रख दी। शनिवार को सभी फाइल वापिस भेज दी गई।
जांच में सक्षम नहीं होने वाले ट्रैफिक विभाग में
केसों की जांच करना अपने आप में टेढ़ी खीर होता है। इनमें सक्षम नहीं होने वाले ज्यादातर पुलिस कर्मी अपना तबादला ट्रैफिक विभाग में करा लेते हैं। यहां केवल चालान काटना और यातायात संभालने का ही काम होता है। पुलिस विभाग में इसे सबसे आसान काम समझा जाता है। सूत्रों के मुताबिक नए पुलिस आयुक्त के सामने भी यही तर्क रखा गया था। ट्रैफिक अधिकारियों ने कहा था कि दिन भर ड्यूटी के बाद केसों का निपटारा करना आसान काम नहीं है। वैसे भी ट्रैफिक में ज्यादातर वही लोग हैं जो जांच में सक्षम नहीं हैं। इसके बाद आयुक्त ने केसों की फाइल वापिस भेजने के आदेश दे दिए। संवाद