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हरे कचरे से बनी जैविक खाद से पार्कों में खिल रही हरियाली

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फरीदाबाद। शहर को प्रदूषण से मुक्त करने की विशेष कवायद सेक्टर-15 आरडब्ल्यूए ने शुरू की है। इसके लिए जैविक कूड़ा प्रबंधन तकनीक के तहत हरे कूड़े-कचरे (सूखी पत्तियां) से जैविक खाद तैयार की जा रही है। इससे शहर का पर्यावरण स्वच्छ होगा और गंदगी से निजात मिलने में काफी हद तक मदद मिलेगी। वहीं, अब हरे कचरे से बनी जैविक खाद से पार्कों में हरियाली खिल रही है।
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अभी यह मुहिम शहर के एक सेक्टर में शुरू हुई है, लेकिन आने वाले समय में अन्य सेक्टरों भी हरे कचरे से जैविक खाद बनाने की तैयारी है। इससे लोगों को प्रदूषण से काफी राहत मिलेगी, क्योंकि शहर की सड़कों और पार्क-परिसर से बड़ी मात्रा में हरा कचरा निकलता है। सेक्टर-15 में दो महीने पहले ही यह प्लांट लगाया गया। अभी तक तैयार जैविक खाद को सेक्टर के पार्कों में प्रयोग में लाया जाता है, लेकिन अब अतिरिक्त तैयार खाद की बिक्री भी करने की तैयारी की जा रही है।
आरडब्ल्यूए प्रधान नीरज चावला ने बताया कि शहर में आरडब्ल्यूए की यह नई पहल है। इससे खासकर पार्कों और सड़क किनारे लगे पेड़-पौधों से निकलने वाला हरा कचरा अब व्यर्थ नहीं जाएगा, बल्कि जैविक खाद बनाने में हरे कचरे का सही उपयोग किया जा रहा है। इससे प्रदूषण पर लगाम के साथ साफ-सफाई भी बढ़िया रहती है। उन्होंने बताया कि शहर के अन्य आरडब्ल्यूए संगठन के लोगों ने इस बारे में उनसे जानकारी ली है और जल्द ही अन्य सेक्टरों में भी प्लांट लगाकर हरे कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस मुहिम से शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
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एक महीने में जैविक खाद तैयार
सेक्टर-15 में हरे कचरे से जैविक खाद बनाने की देखरेख कर रहे राहुल ने बताया कि पहले सड़कों और पार्कों से नीचे गिरी हुई पत्तियों को एकत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे उठाकर प्लांट में लाया जाता है। एक दिन में करीब पांच ट्राली हरा कचरा निकलता है। बाकायदा इसके लिए सफाईकर्मी, माली और कुशल कामगार को रखा गया है। प्लांट में पहले पत्तियों को धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद यंत्र (एसटीपी मशीन) में डालकर उसकी लुगदी (पाउडर) बनाई जाती है। उसके बाद एक-एक स्थान पर कियारी में लुगदी को फैलाकर रख दिया जाता है। इसके बाद उसमें बायो एंजाइम नामक केमिकल डाला जाता है, ताकि वह सड़-गलकर जैविक खाद में परिवर्तित हो जाए। इस प्रक्रिया के बाद करीब एक महीने में जैविक खाद तैयार हो जाती है। तैयार जैविक खाद को पार्कों के पेड़-पौधे में डाला जाता है।
हरे कचरे से जैविक खाद बनाने में गंदगी से भी मुक्ति मिल रही है और सस्ती जैविक खाद भी मिल रही है। शहर अपना है तो साफ सफाई का खयाल भी रखना होगा। सरकारी व्यवस्था को कोसने से अच्छा है स्वयं आगे आएं और शहर को स्वच्छ बनाने की मुहिम में शामिल हों।
-नीरज चावला, आरडब्ल्यूए प्रधान
पार्कों में अब बढ़िया से साफ सफाई रहती है। हम ग्रीन वेस्ट से बने कंपोस्ट को ले जाकर घर में लगे पेड़-पौधे में प्रयोग करते है। रासायनिक कंपोस्ट की अपेक्षा जैविक खाद से पेड़-पौधे अधिक हरे भरे रहते है।
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-समरथ खन्ना, छात्र
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