फरीदाबाद। पैरालंपिक में फरीदाबाद के लिए ऐतिहासिक रहा है। पहली बार ओलंपिक खेलों में जिले के खिलाड़ी विजेता बना। खास बात रही कि वेटलिफ्टिंग में पहला गोल्ड लेने वाली साउथ की खिलाड़ी कर्णम मल्लेश्वरी ने भी फरीदाबाद में रहते हुए ही ओलंपिक गोल्ड अपने नाम किया था। उन्होंने जिले का जिक्र कर अपने संघर्ष के दिनों को याद किया था। हालांकि इस बार फरीदाबाद का नाम संघर्ष और खुशी के साथ पैरालंपिक में सिंहराज व मनीष के साथ लिया जाएगा।
स्पोट्स काउंसिल के पूर्व सचिव दीप भाटिया ने बताया कि फरीदाबाद जिले में खिलाड़ियों और प्रतिभा की कमी नहीं है। ओलंपिक में मेडल जीतने की दावेदारी फीकी पड़ी, उसकी क्षतिपूर्ति इस बार पैरालंपिक खिलाड़ी सिंहराज व मनीष ने पूरी की। पूर्व में हरियाणा का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम जिले में था। सिर्फ इस सुविधा के बूते इसे क्रिकेट से जोड़ कर देखा जाता रहा, जबकि खिलाड़ी सिर्फ क्रिकेट के नहीं अन्य विधाओं के भी उभरे।
दीप भाटिया ने बताया कि दिल्ली के नजदीक होने और स्टेडियम सुविधाएं होने के कारण अब स्कोप बढ़ा है। नए स्टेडियमों में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पनपेंगे। ज्यादातर शूटिंग खिलाड़ी फरीदाबाद से ही निकले हैं। एस्ट्रोटर्फ का मैदान सेक्टर-12 में बनाया गया है। फुटबॉल और बैडमिंटन का स्कोप है। तैराकी की संभावनाएं भी युवाओं के साथ बढ़ रही हैं। यही प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की छवि को निखारेंगी। दो बार के एशियन गेम्स विजेता भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि जिले में पहली बार किसी दो खिलाड़ी ने ओलंपिक स्तर पर पदक जीता है। यही संभावनाओं का विस्तार है। अधाना के गांव में भी शूटिंग रेंज बनवाकर भावी खिलाड़ियों को योगदान दे सकते हैं।