बारिश के दौरान अरावली की पहाड़ियों में बेकार बह जाने वाले पानी को संरक्षित करने की योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही चेम डैम बनाए जाएंगे। इसे फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की ओर से तैयार किया जाएगा। योजना के बाद एक साथ दो लाभ होंगे। अरावली में जल संरक्षित होने का सीधा सकारात्मक प्रभाव भूजल स्तर पर पड़ेगा और पहाड़ी से बारिश का पानी बहकर आसपास के गांवों व सेक्टरों में जमा नहीं होगा।
चेम डैम की गहराई 8 से 10 फुट और चौड़ाई 50 से 100 मीटर होगी। एफएमडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह उस जगहों पर बनाए जाते हैं, जहां ऊपर से पानी आने का फ्लो अधिक होता है। चेम डैम बहते पानी को एकत्र करता है। इसके बाद यहां से पानी रिसकर जमीन के नीचे चला जाता है। इसका फायदा वन्य जीवों को भी होता है। इससे पहाड़ी क्षेत्र में पानी की कमी के साथ जमीन में नमी होने से हरियाली भी होगी।
अरावली तलहटी में बसे गांवों का भूजल स्तर प्रत्येक वर्ष नीचे जा रहा है। जानकारों के अनुसार यहां 400 से 500 फुट जलस्तर नीचे पहुंच गया है। नगर निगम भी आसपास के क्षेत्रों में ट्यूबवेल लगाने से कतरा रहा है। हर साल करीब 10 ट्यूबवेल के बोर के नीचे पानी समाप्त हो जाता है।
सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही चेम डैम बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इसकी योजना तैयार की जा रही है।
-एनडी वशिष्ठ, मुख्य अभियंता, एफएमडीए