फरीदाबाद। नगर निगम के वार्ड बंदी के ड्रॉफ्ट को सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब ड्रॉफ्ट पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। लोग 13 मार्च तक उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त और शहरी निकाय विभाग के निदेशक को सुझाव भेज सकते हैं। इसके बाद वार्ड बंदी के ड्रॉफ्ट को फाइनल कर दिया जाएगा। नई वार्ड बंदी में वार्ड 40 से बढ़कर 45 हो गए हैं। इसमें एनआईटी और बड़खल क्षेत्र में एक-एक वार्ड बढ़ा है।
नगर निगम के वार्ड बंदी के सलाहकार रवि सिंगला ने बताया कि एड हॉक कमेटी के प्रधान उपायुक्त जितेंद्र यादव की अध्यक्षता में वार्ड बंदी के प्रारूप को पहले मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद ड्रॉफ्ट का भौतिक सत्यापन कराया गया। एड हॉक कमेटी ने ड्रॉफ्ट को सही पाने पर मंजूरी के लिए सरकार को भेजा था। उन्होंने बताया कि शुक्रवार देर शाम शहरी निकाय विभाग ने इसे मंजूरी दे दी है। अब इस पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं, जिससे वार्डबंदी के ड्रॉफ्ट में कोई कमी हो तो जरूरत के अनुसार बदलाव कर अंतिम रूप दिया जा सके। सिंगला ने बताया कि ड्रॉफ्ट के बारे में लोग अपने सुझाव उपायुक्त कार्यालय, निगम आयुक्त और शहरी निकाय विभाग के निदेशक को 13 मार्च तक भेज सकते हैं।
महिलाओं के लिए 15 वार्ड आरक्षित
नई वार्ड बंदी के अनुसार, एनआईटी और बड़खल में एक-एक वार्ड और बनाया गया है। वहीं बल्लभगढ़ जोन में एक वार्ड कम हो गया है। निगम में शामिल 24 गांव और कुछ ग्रेेटर फरीदाबाद का हिस्सा लेकर तीन और वार्ड बनाए गए हैं। ऐसे में कई वार्डों के क्षेत्र में बदलाव हुआ है। वर्तमान सर्वे के अनुसार, निगम क्षेत्र की जनसंख्या 26 लाख से ज्यादा है। ऐसे में एक वार्ड की जनसंख्या 58 हजार के आसपास होगी। वहीं कुछ दिन पहले सरकार ने नए वार्ड की अधिसूचना जारी की थी। 45 वार्डों में अनुसूचित जाति-जनजाति की महिलाओं समेत 15 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं।
वार्ड 45 में 11 गांव शामिल
नई वार्ड बंदी के अनुसार, निगम एनआईटी जोन में 9, बड़खल में 11, बल्लभगढ़ में 7, ओल्ड फरीदाबाद में आठ और तिगांव क्षेत्र में 10 वार्ड बनाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, वार्ड 45 में 10 से 11 गांव शामिल हैं। ऐसे में वार्ड-45 के पार्षद के पास ज्यादा क्षेत्र होगा। ऐसे में उनके सामने गांवों के विकास की चुनौती होगी। निगम में हाल में 24 गांवों को जोड़ा गया है। इसके अलावा वार्ड 37 में भी आठ गांव होंगे।
बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
निगम चुनाव में फाइनल वार्ड बंदी कई प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकती है। वार्डों में किए गए परिवर्तन के कारण कई संभावित उम्मीदवार उलझन में हैं। एनआईटी के सुरेश कुमार ने कहा कि वार्ड बंदी में एक जाति वर्ग के लोगों को हर वार्ड में शामिल किया गया है, जिससे चुनावी समीकरण को बदला जा सके। निगम सूत्रों के मुताबिक, वार्ड बंदी में अधिकांश वार्डों में परिवर्तन किया गया है। लोगों का आरोप है कि कुछ वार्ड में पास के क्षेत्र को छोड़कर दूर के भाग को शामिल किया गया है। हालांकि निगम के अनुसार, करीब 20 फीसदी वार्डों के क्षेत्र में बदलाव किया गया है। हालांकि अभी सरकार ने वार्डों को आरक्षित नहीं किया है। माना जा रहा है कि फाइनल ड्रॉफ्ट के बाद यह कार्य होगा।