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Faridabad News: बीमार बेटी के इलाज का खर्च रोका, उपभोक्ता अदालत लगाया जुर्माना और ब्याज

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-बीमार बेटी के इलाज का खर्च रोका, उपभोक्ता अदालत लगाया जुर्माना और ब्याज
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-पीड़ित को इलाज खर्च और मानसिक पीड़ा का हर्जाना, बीमा कंपनी पर सेवा में कमी का आरोप सिद्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बीमा पॉलिसी होने के बावजूद इलाज का खर्च न मिलने पर परेशान पिता ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद अदालत ने पीड़ित के हक में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को इलाज खर्च समेत मानसिक पीड़ा के लिए मुआवज़ा देने का आदेश दिया।

पलवल के रैहड़ाना निवासी नवल सिंह ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने 2018 में बजाज एलियांज से मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जिसमें उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल थे। बाद में यह पॉलिसी बिना स्पष्ट जानकारी दिए मनीपालसिग्ना बीमा कंपनी में ट्रांसफर कर दी गई और वहीं से प्रीमियम कटता रहा।
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एक अप्रैल 2023 को उनकी बेटी हिमांशी को बुखार और एनीमिया की स्थिति में पलवल के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज पर 39,023 खर्च हुए। जब नवल सिंह ने बीमा क्लेम मांगा तो पहले कैशलेस सुविधा नकार दी गई और फिर रीइम्बर्समेंट का क्लेम भी बीमारी की स्पष्टता न होने का हवाला देकर खारिज कर दिया गया। कंपनी के रवैये से परेशान होकर नवल सिंह ने लीगल नोटिस भेजा, परंतु जब जवाब नहीं मिला, तो उपभोक्ता अदालत में केस दायर किया। सुनवाई में बजाज एलियांज ने पल्ला झाड़ा, जबकि मनीपालसिग्ना ने बीमारी की प्रकृति को बहाना बनाया। अदालत ने सबूतों व गवाहों के आधार पर पाया कि शिकायतकर्ता की पॉलिसी लगातार सक्रिय थी और कंपनी का तर्क कमजोर था। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 39,023 इलाज खर्च, छह फीसदी वार्षिक ब्याज, तीन हजार मानसिक पीड़ा व तीन हजार वाद व्यय अदा करे। भुगतान 45 दिन में न होने पर नौ फीसदी ब्याज भी देना होगा।
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