पावटा में मुठभेड़ में मारे गए बल्लू के परिजनों की अपील पर अदालत ने मांगी थी रिपोर्ट
17 अक्तूबर को अदालत में पेश होगी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पावटा में 16 सितंबर देर रात हुए पुलिस के कथित एनकाउंटर मामले में शनिवार को पुलिस ने अभी तक की स्टेटस रिपोर्ट अदालत को दिखाई। पुलिस की तरफ से अभी तक की जांच में कुछ खास निकलकर सामने नहीं आया है। पुलिस ने मामले में एसआईटी गठित करने की बात को अभी तक की अपडेट बताया। इधर, अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसमें घटना की रात का नाट्य रूपांतरण दिखाया गया। साथ ही पुलिस की पूरी कहानी पर सवाल उठाए गए। अदालत ने मामले की पूरी फाइल और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट 17 अक्तूबर को अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।
पावटा में कथित मुठभेड़ में मारे गए युवक बलविंदर उर्फ बल्लू के परिजनों की अपील पर अदालत ने शनिवार को पुलिस से केस की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस की तरफ से धौज थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सत्यवान पेश हुए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव खटाना की अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। थाना प्रभारी ने बताया मामले की जांच डीसीपी एनआईटी की देखरेख में एसीपी ओल्ड फरीदाबाद की अगुआई में की जा रही है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पुलिस के पास आ गई है। पुलिस अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही है।
अभियोजन पक्ष की तरफ से अधिवक्ता तरूण अरोड़ा, मनसा पासवान और एलडी अरोड़ा पेश हुए। अदालत में करीब पांच मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री अभियोजन पक्ष की तरफ से दिखाई गई। जिसमें पुलिस द्वारा बताई गई पूरी कहानी का नाट्य रूपांतरण किया गया। इसी के आधार पर सवाल उठाए गए कि पुलिस की कहानी में कोई साक्ष्य नहीं है। तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी एसआई राकेश के प्रमोशन को लेकर भी अदालत में सवाल उठे। न्यायाधीश गौरव खटाना ने मामले की सुनवाई के लिए 17 अक्तूबर की डेट दी है। अधिवक्ता तरुण अरोडा ने बताया अगली डेट पर पुलिस को पूरे मामले की फाइल सहित अदालत में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
ये था मामला
धौज थानाक्षेत्र स्थित गांव पावटा में शनिवार (16 सितंबर) देर रात क्राइम ब्रांच सेक्टर 48 ने मुठभेड़ में एक युवक को गोली मार दी थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। मृतक की पहचान गांव पावटा मोहब्बताबाद निवासी 27 वर्षीय बलराज उर्फ बलविंदर उर्फ बल्लू (27) के रूप में हुई थी। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए हत्या का केस दर्ज करने के लिए 17 सितंबर को डीसीपी एनआईटी को शिकायत दी थी। तीन दिन बाद पुलिस ने तत्कालीन क्राइम ब्रांच 48 प्रभारी राकेश सहित अन्य के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया।