इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के नाम पर फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार कर बिना काम कराए भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नगर निगम के फर्जी वर्क ऑर्डर के आधार पर 7.63 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित गबन के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) लोकेश गुप्ता की अदालत ने वरिष्ठ ऑडिटर हरगुलाल को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने सह आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिलने, मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना और आरोप साबित होना बाकी होने को फैसले का आधार बनाया। आरोपी को एक लाख रुपये के जमानत बाॅन्ड और इतनी ही राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।
हरियाणा राज्य सतर्कता एवं एंटी करप्शन ब्यूरो फरीदाबाद में 12 अगस्त 2025 को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, बल्लभगढ़ की मोहना रोड पर आरएमसी सड़क के किनारे इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के नाम पर ठेकेदार सतबीर सिंह के पक्ष में आठ फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार किए गए थे। आरोप है कि बिना काम कराए बिल पास कराकर सरकारी खजाने को 7.63 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। हरगुलाल पर वरिष्ठ ऑडिटर रहते हुए अन्य अधिकारियों और ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर भुगतान कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।
डिस्पैच रजिस्टर में नहीं मिला वर्क ऑर्डर का रिकॉर्ड
अदालत के आदेश के मुताबिक, जांच में सामने आया कि 27 नवंबर 2018 को जारी दिखाए गए आठ वर्क ऑर्डर नगर निगम के बल्लभगढ़ डिवीजन-4 से जारी नहीं हुए थे। संबंधित डिस्पैच रजिस्टर में इनका रिकॉर्ड नहीं मिला। अन्य डिवीजनों ने भी वर्क ऑर्डर जारी करने से इन्कार किया था। जांच में कार्यों के शुरुआती अनुमान बढ़ाने और 8 दिसंबर 2018 को संशोधित अनुमानों की मंजूरी दिए जाने का रिकॉर्ड भी मिला। आरोप है कि प्रत्येक कार्य की राशि एक करोड़ रुपये से कम रखी गई, ताकि नए सिरे से प्रशासनिक मंजूरी की जरूरत न पड़े।
सह आरोपी को मिली जमानत भी बना आधार
बचाव पक्ष ने दलील दी कि वर्क ऑर्डर जारी करना इंजीनियरिंग शाखा का काम था। हरगुलाल 18 जून से न्यायिक हिरासत में है और उससे कोई बरामदगी नहीं करनी है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताते हुए जमानत का विरोध किया। अदालत ने सह आरोपी नवीन रात्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से एक अक्तूबर 2026 को मिली जमानत का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, हरगुलाल का मामला भी समान परिस्थितियों वाला है और मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना कम है। इसी आधार पर 17 अक्तूबर 2026 को नियमित जमानत मंजूर कर दी गई।