फरीदाबाद में किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली की तरफ जाने वाले किसान हाथों में तिरंगे झंडे भारत माता क
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फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। कृषि कानून के विरोध में पैदल मार्च पर निकले किसानों के विरोध प्रदर्शन में आसपास के गांवों का सहयोग काबिल-ए-तारीफ है। किसान जहां जहां से गुजर रहे हैं उनका भरपूर ख्याल रखा जा रहा है। शुक्रवार को किसानों ने झाड़सैंतली के सरकारी स्कूल में रुकने का फैसला तो लिया, लेकिन ठंड होने के कारण गिने चुने किसानों ने ही यहां रात गुजारी।
दरअसल, पलवल पास का जिला होने के कारण ज्यादातर किसानों की रिश्तेदारियां फरीदाबाद के गांवों में हैं। ठंड के मौसम में किसानों के खुले आसमान में रुकने की बात जैसे ही आसपास के गांवों तक पहुंची तो ग्रामीण अपने रिश्तेदारों को लेने स्कूल में ही पहुंच गए। किसानों ने भी एक रणनीति के तहत स्कूल की बजाय आसपास रात गुजारने का निर्णय लिया। किसानों को कहीं न कहीं यह संदेह जरूर था कि प्रशासन उन्हें सुबह स्कूल में ही रोकने की कोशिश करेगा। यदि ऐसा होता तो आसपास के गांवों में ठहरे किसान नेता आंदोलन का नेतृत्व करते और बाहर से ही सड़क पर उतर आते।
एक ही जगह रुकना ठीक नहीं
किसानों ने योजना बनाई कि एक जगह पर सभी का रुकना आंदोलन के लिए रुकावट भी बन सकता है। झाड़सैंतली के पास लगते गांवों में जाजरू, खंदावली, कैली, समयपुर, साहूपुरा, सागरपुर गांव हैं। यहां के सरपंचों व नंबरदारों से पुलिस के खुफिया विभाग व पुलिस स्टाफ ने बातचीत कर किसी अप्रिय घटना को नहीं घटने देने का आश्वासन भी लिया। प्रशासन किसी भी सूरत में कोई बवाल नहीं चाहता। इसके संकेत बृहस्पतिवार को ही मिल गए थे। बिना किसी झड़प या टकराव से किसान जिले में प्रवेश कर गए।
बल्लभगढ़ में आते ही पैदल मार्च में जुड़ गईं कई लग्जरी गाड़ियां
जैसे ही किसानों ने बल्लभगढ़ में प्रवेश किया, उनके साथ लग्जरी गाड़ियों वाले किसान भी जुड़ गए। ये उन गांवों से आए हुए लोग थे जिनकी जमीन में औद्योगिक इकाइयां लग गई हैं या जिनकी जमीनों पर बिल्डर ने बड़ी-बड़ी इमारतें बना दी हैं। सबसे आगे चल रही एक गाड़ी की छत पर युवा तिरंगे झंडे के साथ बैठे हुए थे। उसके पीछे लाइन से गाड़ियों का एक काफिला चल रहा था। गाड़ियों में बैठे ये किसान भी प्रदर्शन में शामिल हुए और किसानों के हक की आवाज उठाई। (संवाद)