फरीदाबाद। एनआईटी पांच स्थित एच ब्लॉक के मकान नंबर 69 में 22 वर्षीय शीला उर्फ शीनू की जान बिजली के तार की चपेट में आने से चली गई। चाची मंजू धूपर चाय बेचकर उसे सीए की पढ़ाई करा रही थी। उम्मीद थी कि वह अब सीए बन जाएगी और परिवार की आर्थिक तंगी के दिन दूर हो जाएंगे।
मंजू ने बताया कि शीला के माता पिता का देहांत काफी पहले हो गया था। शीला के अलावा उसकी दो बहन व एक भाई हैं। सभी पढ़ाई करते हैं। घर में कमाई का कोई अन्य साधन नहीं है। चाचा और दादा का भी कुछ दिनों पहले ही देहांत हुआ है। शीला के चाचा भी चाय बेचते थे। उनकी मौत के बाद घर चलाने की सारी जिम्मेदारी मंजू के कंधों पर आ गई। शीला ने कई बार काम में हाथ बंटाना चाहा, लेकिन हर बार उसकी चाची ने उसे रोक दिया।
उन्होंने बताया कि उनका शीला को सीए बनते देखने का सपना अधूरा ही रह गया। परिवार को आर्थिक मदद के लिए बिजली विभाग ने कहा है। अभी उसके लिए पता नहीं कितने धक्के खाने पड़ेंगे। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार बिजली के तारों को ग्रिल से दूर करने के लिए बिजली कार्यालय में अर्जी दी थी, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नही रेंगती। नियमों के अनुसार बिजली के खुले तार मकान के छज्जे से करीब छह से सात फीट दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन शीला के मकान की ग्रिल से बिजली की तार दो से ढाई फीट की दूरी पर ही थी।
परिजनों ने बताया कि शीला जिस कंबल को ग्रिल पर सूखा रही थी वह गीला नहीं था। वह बस उसे थोड़ी देर धूप में डालना चाहती थी। मंगलवार सुबह ही खिली धूप को देखकर शीला ने कंबल को संदूक से निकाला था। इसी को बालकनी की ग्रिल पर डालने के दौरान वह वहां से गुजर रहे बिजली के तारों की चपेट में आ गई।