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Faridabad News: शाम 5 बजे सायरन बजते ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने लगे लोग

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ऑपरेशन शील्ड के तहत हुई मॉक ड्रिल, अग्निशमन, आपातकाल राहत, स्वास्थ्य सेवाएं परखी गईं
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। आपातकालीन तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के लिए फरीदाबाद में शनिवार शाम ऑपरेशन शील्ड के तहत मॉक ड्रिल आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में शाम 5 बजे एनटीपीसी पावर प्लांट व एयर फोर्स स्टेशन डबुआ में निर्धारित समयावधि में यह मॉक ड्रिल हुई। जिसमें एनसीसी, एनएसएस, पुलिस, एयर फोर्स व अन्य राहत दल मौजूद रहा। इस दौरान अग्निशमन, आपातकाल राहत, स्वास्थ्य सेवाएं परखी गईं। लगभग 30 मिनट तक मॉक ड्रिल की गई।

इस अभ्यास में वायुसेना के जवानों के साथ-साथ एनसीसी, एनएसएस, पुलिस विभाग, होमगार्ड्स, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य राहत दलों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। ड्रिल में लगभग 20 सिविलियन परिवारों को भी शामिल किया गया, जिन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।
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मॉक ड्रिल में सांय 5 बजे सायरन के बजने के साथ ही आगजनी, एयर स्ट्राइक जैसी आपदा की स्थिति में तुरंत प्रभाव से सभी एक्टिव मोड़ में आ गए और लोग स्वयं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने लगे। जहां कहीं भी आपदा की स्थिति के दौरान लोग ऊपरी तलों पर फंस गए थे उन्हें सुरक्षित तरीके से फायर ब्रिगेड कर्मियों व आपदा मित्रों व एनसीसी वॉलंटियर्स ने नीचे उतारा। चिकित्सा टीमों ने त्वरित प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई और पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सभी विभागों के बीच वायरलेस और अन्य संचार माध्यमों के द्वारा प्रभावी तालमेल स्थापित किया गया।

अभ्यास के दौरान सभी विभागों को मॉक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिनका गहन मूल्यांकन संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। जिला प्रशासन ने इस अभ्यास को सफल बताते हुए इसे भविष्य में आपदा से निपटने की तैयारियों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
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इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में जन-धन की रक्षा के लिए की गई तैयारियों की जांच करना रहा। जिला उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष विक्रम सिंह के मार्गदर्शन में फरीदाबाद में ड्रिल का आयोजन किया गया। उपायुक्त ने कहा कि इस अभ्यास से न केवल वर्तमान आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की कार्यप्रणाली को परखा गया, बल्कि नागरिक प्रशासन, सुरक्षाबलों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का भी प्रयास किया गया। इस प्रक्रिया में ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई जिनमें सुधार और मजबूती की आवश्यकता है।
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