फरीदाबाद। दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में शुक्रवार को हुए शूटआउट के बाद फरीदाबाद पुलिस ने सेक्टर-12 स्थित कोर्ट में भी सुरक्षा पहले से बढ़ा दी है। शनिवार को यहां सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए 10 और पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। अब यहां गेट पर सघन जांच की जा रही है जिसमें 23 पुलिस कर्मी लगाए गए हैं। इससे पहले 13 कर्मी ड्यूटी दे रहे थे।
शुक्रवार को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट के कमरा नंबर 207 में पेशी के लिए आए गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड जज के सामने ही हुआ। हमलावर वकील की पोशाक में आए थे। हालांकि, पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में दोनों हमलावर भी ढेर कर दिए लेकिन शूटआउट से कोर्ट परिसर की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस वारदात के बाद फरीदाबाद पुलिस भी सतर्क हो गई है। फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट में करीब तीन हजार वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके अलावा रोजाना सैकड़ों लोग अदालत संबंधित काम के लिए पहुंचते हैं। इनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए परिसर में 225 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही गेट पर सघन जांच के लिए लगभग 11 मेटल डिटेक्टर उपकरण लगे हैं।
छुट्टी फिर भी पुलिस रही चौकन्नी
शनिवार को कोर्ट में छुट्टी थी। बावजूद इसके कोर्ट परिसर में ड्यूटी दे रहे पुलिस के जवान चौकन्ने रहे। परिसर में पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सघन जांच की जाती रही। मेटल डिटेक्टर से जांच के अलावा पुलिस लोगों के बैग व थैले की भी जांच कर रहे थे। इसके अलावा, संदिग्धों पर खास नजर रखी जा रही है।
उच्च अधिकारी रोज करेंगे समीक्षा
फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा अब रोज एक अधिकारी करेंगे। साथ ही ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस कर्मियों को जानकारी दे दी गई है कि यहां पहुंचने वाले हर किसी की सघन जांच करें। चौकस रहे हैं और किसी भी अंजान व्यक्ति की बारीकी से पूछताछ और जांच करें।
कोर्ट में सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। हर एंट्री प्वाइंट पर मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए। वकीलों को विशेेष कार्ड यानी इलेक्ट्रॉनिक कार्ड जारी किया जाना चाहिए। इससे वकील के नाम से कोई कोर्ट में नहीं जा सकेगा।
- मनोज शर्मा, एडवोकेट।
फरीदाबाद कोर्ट में भी कई बार अप्रिय घटना हो चुकी है लेकिन, कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है। एंट्री प्वाइंट पर लगे सभी मेडल डिटेक्टर दुरुस्त होने चाहिए, लोगों की सघनता से जांच होनी चाहिए।
- कुलदीप चंदीला, एडवोकेट।