दो साल कॉल सेंटर में काम के दौरान सीखी तकनीक
जांच में पता चला कि आरोपी रियाज ने अपने दोस्तों के साथ तीन माह पहले ही फर्जी कॉल सेंटर खोला था। वह छतरपुर के एक कॉल सेंटर में 2 साल से काम किया था। जहां उसने कॉल सेंटर चलाने की तकनीक सीखी। उसके बाद वह वहां काम करने वाले हेल्पर अंकित अपने दो पुराने दोस्तों किशन यादव और मनोरथ के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर खोलने की योजना बनाई। जनवरी 2022 में विजय नगर डबल स्टोरी में किराए के परिसर में कॉल सेंटर शुरू किया। किशन यादव ने महिला टेलीकॉलर को नौ हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम पर रखा। उन्हें वेबसाइटों और लिंक के माध्यम से विभिन्न कंपनियों के बेचे वाहनों का विवरण दिया गया।
साथ ही पॉलिसीबाजार डॉट कॉम जैसी वेबसाइटों से ग्राहकों का डेटा लेते थे। टेली कॉलर बीमा एजेंट बनकर ग्राहकों को कार बीमा के नवीनीकरण के लिए फोन करती थी। वह उन्हें अपनी पॉलिसी को रियायती दरों पर नवीनीकृत करने का लालच देती थीं। ग्राहकों के भेजे पैसे अंकित के खाते में डाले जाते थे और बाद में रकम को अलग-अलग बैंकों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। मोहम्मद रियाज इस कॉल सेंटर का मालिक था। पुलिस ने बताया कि मोहम्मद रियाज स्नातक तक की पढ़ाई की है वहीं किशन यादव ने एलएलबी की पढ़ाई किया हुआ है। अन्य सभी आरोपी 10वीं या 12वीं पास हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने दिल्ली एनसीआर के अलावा सूरत, पश्चिम बंगाल तेलंगाना और बेंगलुरु में रहने वाले लोगों से ठगी की है। पुलिस के पास अन्य राज्यों से भी शिकायत मिली है। पुलिस पूछताछ कर जांच कर रही है।