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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

Wed, 10 May 2017 10:43 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल। - फोटो : फाइल फोटो
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मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने सबके सामने ईवीएम मशीन को हैक करके दिखाया। सौरभ ने आधे घंटे से भी ज्यादा चले अपने डेमो ये साबित कर दिया कि ईवीएम को भी आसानी से हैक किया जा सकता है। 
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हालांकि, चुनाव आयोग ने इस मसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस मसले पर 12 मई को सभी दलों की बैठक होगी, उसके बाद ही कोई बयान दिया जाएगा। आयोग के सूत्रों ने साफ किया है कि जिस मशीन का इस्तेमाल आप विधायक ने सदन में किया वो सिर्फ एक प्रोटो-टाइप है।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग की मशीनों में किसी तरह के कोड का इस्तेमाल नहीं होता। इनके मदरबोर्ड को भी बदला नहीं जा सकता है। चुनाव आयोग जिन मशीनों के इस्तेमाल की इजाजत देती है उसके बटन दबाने के बाद ब्लॉक हो जाते हैं। ऐसे में किसी तरह का सीक्रेट कोड नहीं डाला जा सकता।
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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों और दिल्ली एमसीडी चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। आइए, जानते हैं कैसे काम करती है ईवीएम और इसमें सुरक्षा की कितनी गारंटी है। 

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पांच-मीटर केबल से जुड़ी दो यूनिटों-एक कंट्रोल यूनिट और एक बैलेटिंग यूनिट से बनी होती है। कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है। जबकि, बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी होती है। बैलेट पेपर जारी करने के बजाए, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाएगा। यह मतदाता को बैलेटिंग यूनिट पर अपनी पसंद के उम्मीदवार और चुनाव चिन्ह के सामने नीले बटन को दबाकर अपना मत डालने के लिए सक्षम बनाएगा।

सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रतिष्ठानों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बंगलुरु और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद के सहयोग से भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की खोज और डिजाइनिंग की।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल भारत में आम चुनाव और राज्य विधानसभाओं के चुनाव में आंशिक रूप से 1999 में शुरू हुआ। 2004 से इसका पूर्ण इस्तेमाल हो रहा है। 

मशीन की लागत क्या  है?

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वर्ष 1989-90 में जब मशीनें खरीदी गई थीं उस समय प्रति ईवीएम (एक कंट्रोल यूनिट, एक बैलेटिंग यूनिट एवं एक बैटरी) की लागत 5500/- थी। यद्यपि, प्रारंभिक निवेश किंचित अधिक है, लाखों मत पत्रों के मुद्रण, उनके परिवहन, भंडारण आदि, और मतगणना स्टाक  एवं उन्हें भुगतान किए जाने वाले पारिश्रमिक में काफी कमी हो जाने की दृष्टि से हुई बचत के द्वारा अपेक्षा से कहीं अधिक निष्प्रभावी हो जाता है।

ईवीएम में अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकते हैं। जैसा कि सामान्य तौर पर होता है, एक मतदान केन्द्र में निर्वाचकों की कुल संख्या 15,00 से अधिक नहीं होगी फिर भी, ईवीएम की क्षमता पर्याप्त से अधिक है।

ईवीएम अधिकतम 64 अभ्यार्थियों के लिए काम कर सकती है। एक बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्यार्थियों के लिए प्रावधान है। यदि अभ्यार्थियों की कुल संख्या16 से अधिक हो जाती है, तो पहली बैलेटिंग यूनिट के साथ-साथ एक दूसरी बैलटिंग यूनिट जोड़ी जा सकती है। 

ईवीएम में बटन को बार-बार दबाकर एक से अधिक बार मतदान करना संभव नहीं है। जैसे ही बैलेटिंग यूनिट पर एक विशेष बटन को दबाया जाता है, उस विशेष अभ्यार्थी के लिए मत दर्ज हो जाता है और मशीन लॉक हो जाती है। उस परिस्थिति में भी जब (चाहे) कोई व्यक्ति उस बटन को या किसी अन्य बटन को आगे और दबाता है, तो और कोई भी मत दर्ज नहीं होगा। इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनें इस तरह से ''एक व्यक्ति, एक मत'' का सिद्धांत सुनिश्चित करती हैं।

क्या ईसीआई-ईवीएम को हैक किया जा सकता है?

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ईवीएम मशीनों के एम 1 (माडल 1) का विनिर्माण 2006 तक पूरा कर लिया गया था और कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे दावों के विपरीत एम 1 मशीनों की सभी अनिवार्य तकनीकी विशेषताओं को ऐसा बनाया गया था, कि उन्हें हैक न किया जा सके।
2006 में तकनीकी मूल्यांकन समिति की सिफारिशों के आधार पर 2006 के बाद और 2012 तक विनिर्मित ईवीएम के एम 2 मॉडल में अतिरिक्त सुरक्षा विशेषता के रूप में एन्क्रिप्टिड फार्म यानी कूट रूप में प्रमुख कोड्स की डायनामिक कोडिंग शामिल की गई।

जिसके फलस्वरूप बैलेट यूनिट से कंट्रोल यूनिट में की-प्रेस संदेश हस्तांतरित करना संभव हुआ। इसमें प्रत्येक की-प्रेस की रीयल टाइम सेटिंग भी शामिल है, ताकि तथाकथित दुर्भावनापूर्ण सीक्वेंस की गई की-प्रेस सहित की-प्रेस की सीक्वेंसिंग का पता लगाया जा सके और रैप्ड किया जा सके।

इसके अतिरिक्त ईसीआई-ईवीएम कम्प्यूटर नियंत्रित नहीं है, वे स्टैंड अलोन यानी स्वतंत्र मशीनें हैं और वे इंटरनेट और/या किसी अन्य नेटवर्क के साथ किसी भी समय बिंदु पर कनेक्टिड नहीं हैं। अतः किसी रिमोट डिवाइस के जरिए उन्हें हैक करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

क्या सीयू में चिप के भीतर ट्रोजन होर्स को घुसाया जा सकता है?

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ईवीएम में वोटिंग की सीक्वेंस निम्नांकित अनुसार ट्रोजन होर्स के इंजेक्शन की आशंका को समाप्त करती है। निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा उपाय फील्ड में ट्रोजन होर्स का प्रवेश असंभव बना देते हैं।

जब कंट्रोल यूनिट में कोई बैलेट की प्रेस की जाती है, तो सीयू, बीयू को वोट रजिस्टर करने की अनुमति देती है और बीयू में की-प्रेस होने का इंतजार करती है। इस अवधि के दौरान सीयू में सभी कीज़ उस वोट के कास्ट होने की समूची सीक्वेंस पूरा होने तक निष्क्रिय हो जाती हैं। किसी मतदाता द्वारा कीज़ (उम्मीदवारों के वोट बटन) में से कोई एक की दबाने के बाद बीयू उस की से संबंधित जानकारी सीयू को ट्रांसफर करती है। सीयू को डेटा प्राप्त होता है और वह बीयू में एलईडी लैंप की चमक के साथ उसकी प्राप्ति स्वीकार करती है। 

सीयू में बैलेट को सक्षम करने के बाद केवल ‘प्रथम प्रेस की गई की’ को सीयू द्वारा सेंस और स्वीकार किया जाता है। इसके बाद, भले ही कोई मतदाता अन्य बटनों को दबाता रहे, उसका कोई असर नहीं होता, क्योंकि बाद में दबाए गए बटनों के परिणामस्वरूप सीयू और बीयू के बीच कोई कम्युनिकेशन नहीं होता है और न ही बीयू किसी की-प्रेस को रजिस्टर करती है।

विकसित देशों ने ईवीएम को क्‍यों नहीं अपनाया है?

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कुछ देशों ने अतीत में इलेक्‍ट्रोनिक मतदान के साथ प्रयोग किया है। इन देशों में मशीनों के साथ समस्‍या यह थी कि वे कंप्‍यूटर द्वारा नियंत्रित थे एवं नेटवर्क से जुड़े थे, जिसके कारण उनमें हैकिंग किए जाने की आशंका थी जिससे इसका उद्देश्‍य पूरा नहीं हो पाता था। इसके अतिरिक्‍त, उनकी सुरक्षा, हिफाजत एवं संरक्षण से संबंधित कानूनों एवं विनियमनों में पर्याप्‍त सुरक्षा के उपायों की कमी थी। कुछ देशों में अदालतों ने केवल इन्‍हीं कानूनी आधारों की वजह से ईवीएम के उपयोग को स्‍थगित कर दिया।

भारतीय ईवीएम एक स्‍वतंत्र प्रणाली है जबकि अमेरिका, नीदरलैंड, आयरलैंड एवं जर्मनी के पास प्रत्‍यक्ष रिकार्डिंग मशीने थीं। भारत ने हालांकि आंशिक रूप से ही सही, कागज लेखा परीक्षा निशान (पेपर ऑडिट ट्रेल) लागू किया है। दूसरे देशों के पास लेखा परीक्षण निशान नहीं थे। उपरोक्‍त सभी देशों में मतदान के दौरान सोर्स कोड को बंद कर दिया जाता है। भारत के पास भी मेमो‍री से जुड़े क्‍लोज्‍ड सोर्स और ओटीपी है।

दूसरी तरफ, ईसीआई-ईवीएम स्‍वतंत्र उपकरण है, जो किसी भी नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं और इसलिए भारत में व्‍यक्तिगत रूप से किसी के लिए भी 1.4 मिलियन मशीनों के साथ छेड़छाड़ करना असंभव है। मतदान के दौरान देश में पहले होने वाली चुनावी हिंसा एवं फर्जी मतदान, बूथ कैप्‍चरिंग आदि जैसी अन्‍य चुनाव संबंधी गलत प्रचलनों को देखते हुए ईवीएम भारत के लिए सर्वाधिक अनुकूल हैं।
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वीवीपीएटी मशीनों की क्‍या स्थिति है?

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ईसीआई ने मतदाता सत्‍यापित कागज लेखा परीक्षा निशान (वीवीपीएटी) का उपयोग करते हुए 107 विधानसभा क्षेत्रों एवं 9 लोकसभा चुनाव क्षेत्रों में चुनावों का संचालन किया है। वीवीपीएटी के साथ-साथ एम2 एवं नई पीढ़ी एम3 ईवीएम का उपयोग मतदाताओं के भरोसे एवं पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्‍मक योजना है।
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