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ससुराल और मायके के दखल से टूटते हैं 80 फीसदी रिश्ते

Thu, 02 Aug 2018 03:59 PM IST
मनोज कुमार, अमर उजाला, नोएडा
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फाइल फोटो
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पति-पत्नी के बीच का विवाद परिवार टूटने का एक कारण तो है मगर सबसे बड़ी वजह नहीं। ससुराल पक्ष और मायके वालों के ज्यादा दखल से भी परिवार टूट जाते हैं। 
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जिले में दंपतियों के बीच होने वाले अलगाव के 80 फीसदी मामले में सुसराल पक्ष और मायके पक्ष के दखल से जुड़े विवाद होते हैं। जबकि केवल बीस फीसदी मामलों में पति-पत्नी के आपसी विवाद की वजह से परिवार टूट जाता है। 

 पारिवारिक विवाद के मामलों की काउंसलिंग करने वालों पुलिसकर्मियों के मुताबिक कई बार दंपती साथ रहना चाहते हैं, लेकिन ससुराल और मायके वाले प्रतिष्ठा की बात रखकर अड़ जाते हैं और बसा-बसाया परिवार टूटने पर मजबूर हो जाता है।
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गौतमबुद्घ नगर जिले में हर माह पारिवारिक विवाद से जुड़ी करीब 100 शिकायतें महिला थाने में दर्ज कराई जाती है। इनमें करीब 40 फीसदी शिकायतें सास-ससुर और ननद से संबंधित होती हैं और 40 फीसदी शिकायतें मायके वालों के कारण हुए विवाद के बाद आती हैं। 

जबकि दंपती के आपसी विवाद के मामले केवल 20 फीसदी ही होते हैं। इन सभी शिकायतों में कई ऐसे केस आते हैं जिनमें पति या पत्नी के परिजन अपनी जिद पर के आगे उनकी नहीं सुनते। पति-पत्नी क्या चाहते हैं वह उनसे नहीं पूछते हैं और स्वयं ही दोनों को अलग करने का निर्णय ले लेते हैं।

जबकि असल में दंपती के बीच विश्वास टूटने या अन्य कारणों से गुस्सा होता है और यदि दोनों को साथ बैठाया जाए तो काफी हद तक मामलों में बात बन जाती है। मगर दोनों परिवारों के बीच विवाद इतना बढ़ जाता है कि पति-पत्नी चाहते हुए भी अपनी बात नहीं रख पाते हैं और परिवार की भावनाओं में बहकर रिश्ता तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

केस-1
सेक्टर-39 में सुल्ताना को उसका पति हैदर परेशान करता था और अक्सर मारपीट करता रहता था। इस मामले में सुल्ताना की मां अक्सर फोन करके अपनी बेटी को समझाती थी लेकिन फिर भी घर में विवाद और बढ़ता गया। जिससे दोनों ने अलग होने की ठान ली। मगर पुलिस के पास मामला पहुंचा और महिला पुलिस ने समझाया तो पति ने कहा कि सास बात करना बंद कर दें तो उनको कोई परेशानी नहीं है। अब कई माह से दोनों बिना किसी परेशानी के एक साथ रह रहे हैं।
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केस-2
सतीश और उसकी पत्नी के बीच विवाद था, जिसमें वर पक्ष के लोग अपना दखल दे रहे थे। दंपती के निजी जीवन को भी सफल बनाने में परेशानी पैदा कर रहे थे। जिससे दोनों के बीच तलाक तक की नौबत आ गई। महिला पुलिस ने काउंसलिंग की तो दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हो गए। मगर अब दोनों ने एक दूसरे के साथ घरवालों से अलग रहकर नए तरीके से जीवन शुरू कर दिया है।

ढाई साल में सैकड़ों परिवार को टूटने से बचाया
सेक्टर-39 स्थित महिला थाने में एचसीपी कृष्णपाल करीब ढाई साल से तैनात हैं और वह सुबह से लेकर शाम तक केवल महिलाओं और उनके ससुरालियों के बीच विवाद को सुलझाने का प्रयास करते हैं। लड़के पक्ष को भी समझाते हैं और लड़की पक्ष को भी कई-कई घंटे तक काउंसलिंग करते हैं। कई टूटे घरों का उदाहरण देते हैं और दूसरी शादी के बाद के कुछ उदाहरण देकर भविष्य दिखाने का प्रयास करते हैं। काफी जोड़े उनकी बातों से सहमत हो जाते हैं। कई बार समझौते के बाद लोग उनसे आशीर्वाद तक लेने आते हैं।

कोट:-
जिले भर से परिवार के विवाद थाने में आते हैं तो प्रयास किया जाता है कि हर परिवार जुड़ जाए। इसके लिए कम से कम 3 बार काउंसलिंग की जाती है। जरूरत पड़ने पर 6 से 7 बार तक काउंसलिंग भी की जाती है। यह देखा गया है कि अधिकतर मामलों में ससुराल और मायके का हस्तक्षेप परिवार को तोड़ने में भूमिका निभा रहा है जो दंपती के बीच दूरियां बढ़ा देता है। जबकि दंपती एक दूसरे के साथ रहना चाहते हैं। - अंजू तेवतिया, इंस्पेक्टर महिला थाना सेक्टर-39
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