डीपी यादव को राजनीति का पाठ पढ़ाकर विधानसभा तक पहुंचाने वाले महेंद्र सिंह भाटी को क्या पता था कि जिसे वे अपना मान रहे है वही सियासी रोड़ा समझकर उन्हें रास्ते से हटाने के लिए हत्या करा देगा। केंद्र की राजनीति तक महेंद्र भाटी का बढ़ता कद उनके विरोधियों को रास नहीं आया। डीपी यादव के साथ सभी विरोधी एकजुट हुए और उनकी हत्या करा दी। महेंद्र सिंह भाटी के विधायक होने के दौरान डीपी यादव उनके काफी नजदीक थे। अधिकांश समय उनके साथ रहते थे।
भाटी ने ही डीपी यादव को सियासत की एबीसीडी सिखाई थी और 1988 में पहली बार ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़वाया था। डीपी यादव ब्लॉक प्रमुख बने। उसके बाद 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में डीपी को बुलंदशहर विधानसभा सीट से चुनाव जीताकर विधानसभा में पहुंचाने वाले भी भाटी ही थे। लेकिन 1990 में सियासी द्वेष के चलते दोनों अलग हो गए थे। दोनों के बीच विरोध लगातार बढ़ता गया। 1991 में गाजियाबाद में महेंद्र फौजी और सतवीर गुर्जर गिरोहों में गैंगवार चल रही था। सतवीर दादरी आकर महेंद्र सिंह भाटी के साथ मिल गया। वहीं महेंद्र का गुट डीपी यादव से जा मिला।
दोनों गुट एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। 7 अप्रैल 1991 को महेंद्र सिंह भाटी के छोटे भाई राजवीर भाटी की दादरी के रेलवे रोड पर हत्या कर दी गई। उसके बाद फरवरी 1992 को गाजियाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण भाटी की बरौला में सड़क हादसे में मौत हुई। दो ट्रकों के बीच टक्कर से प्रवीण भाटी के मरने पर परिजनों को शक था कि महेंद्र भाटी ने हादसे का रूप देकर हत्या कराई है। उसके चलते ही परिवार के लोग डीपी यादव से मिल गए। प्रवीण के पिता तेजपाल भाटी, उसके भाई प्रणीत भाटी ने लक्कड़पाला, करण यादव, डीपी यादव समेत आठ लोगों के साथ मिलकर महेंद्र सिंह भाटी की 13 सितंबर 1992 को रेलवे क्रॉसिंग पर हत्या करा दी।
महेंद्र भाटी से प्रभावित थे कद्दावर नेता
सन 1984 में महेंद्र सिंह भाटी ने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़कर दादरी विधानसभा सीट पर जबरदस्त जीत हासिल की थी। वे तीन बार विधायक रहे थे। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जडे़ं मजबूती से जमा चुके महेंद्र सिंह भाटी उन लोगों की आंखों की किरकिरी बन गए थे, जिन्हें उन्होंने खुद राजनीति का कहकरा सिखाया था।
दरअसल, जब महेंद्र सिंह भाटी विधायक थे उस दौरान खुर्जा लोकसभा सीट से सांसद कौन होगा वे स्वयं तय करते थे। क्षेत्र के लोगों को उनका इशारा ही काफी होता था। फिर चाहे प्रत्याशी किसी भी दल या पार्टी का हो। उनका सियासी कद लगातार बढ़ता जा रहा था जिससे सूबे के कद्दावर नेताओं की चिंता बढ़ रही थी।
उस दौर के नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, लालू प्रसाद यादव, अरुण नेहरू, रामविलास पासवान, अजीत सिंह आदि महेंद्र सिंह भाटी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट भी उनका लोहा मानते थे।