साथ ही किसी भी बिना किसी गलती के हाथ-आंख की मदद से होने वाले एंडोस्कोपिक कौशल को सुधारने के लिए प्रशिक्षित करेगा। साथ ही उन डॉक्टरों को अंक देकर उनकी सर्जरी तकनीक का मूल्यांकन भी करेगा। लैब में होने वाले इस प्रशिक्षण की मदद से लाइव होने वाले न्यूरो सर्जन के मूल्यांकन का बोझ कम होगा। आने वाले दिनों में मानकीकृत प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रोटोकॉल भी तैयार हो सकेगा।
तकनीक से सर्जरी हो रही आसान
एम्स के न्यूरो-इंजीनियरिंग लैब के वैज्ञानिक डॉ. रमनदीप सिंह ने कहा कि 3डी प्रिंटिंग और बॉयोमैकेनिकल गुण न्यूरोसर्जिकल सिमुलेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह उसी तरह के शारीरिक मॉडल के विकास को सक्षम करते हैं, जो मस्तिष्क के ऊतकों की भौतिक विशेषताओं को सटीक रूप से दोहराते हैं। इससे सर्जनों के कौशल को निखारने में मदद मिलती है। यह तकनीक आने वाले दिनों में काफी मददगार साबित होगी।
प्रशिक्षण में आएगा बदलाव: निदेशक
एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह तकनीक भविष्य के सर्जनों को पढ़ाने के तरीके को बदल सकता है। इस परियोजना की मदद से एआई का इस्तेमाल करके सूक्ष्म और एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी प्रशिक्षण को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में प्रौद्योगिकी के विकास के विकास और शोध को बढ़ावा मिलेगा।