राजधानी में स्मॉग की चादर के कारण लोगों का दम घुटने लगा है। आंखों में जलन के साथ-साथ ही लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है। मंगलवार को मौसमी दशाओं के अनुकूल होने से मामूली सुधार के बावजूद लगातार आठवें दिन हालात बिगड़े रहे। दिल्ली-एनसीआर में ग्रेटर नोएडा 457 वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा, जबकि 395 अंकों के साथ दिल्ली दूसरे नंबर पर रही। पूर्वानुमान है कि अगले छह दिनों में दिल्ली की आबोहवा बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली में प्रमुख सतही हवाएं दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पूर्व दिशाओं से 8-4 किमी प्रतिघंटे की गति से चलीं। दिन में धूप खिली और रात के तापमान में करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़त हुई। हवा के दिशा में आए बदलाव व अनुकूल हुए मौसम के बाद भी प्रदूषण में मामूली सुधार दर्ज किया गया। सोमवार को दिल्ली का एक्यूआई 421 था, जो मंगलवार को घटकर 395 हो गया। बुधवार को एक बार फिर हवा की दिशा में बदलाव की आशंका है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
अनुमान है कि मंगलवार को मुख्य सतही हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 4-12 किमी प्रति घंटे से चल सकती है। दोपहर या शाम तक आंशिक रूप से बादल छा सकते हैं, जबकि सुबह धुंध या हल्का कोहरा छा सकता है जो प्रदूषक तत्व के फैलाव में बाधा बनेगा। दिल्ली में 10 नवंबर तक वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रहने की आशंका है।
आधी दिल्ली में एक्यूआई 400 के पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक मंगलवार शाम को दिल्ली के आधे से अधिक केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर 400 पार दर्ज किया गया। बोर्ड 34 केंद्रों से प्रदूषण डाटा एकत्रित करता है। इनमें से आनंद विहार में सबसे ज्यादा 448 एक्यूआई दर्ज किया गया। वहीं शादीपुर, डीटीयू, आरके पुरम, पंजाबी बाग, मथुरा रोड, आईजीआई एयरपोर्ट, नेहरू नगर, द्वारका सेक्टर 8, पटपडगंज, डॉ. करण सिंह शूटिंग रेंज, जहांगीरपुरी, रोहिणी, विवेक विहार, नरेला, ओखला, मुडंका, आनंद विहार में एक्यूआई 400 से अधिक रहा।
दिल्ली में 10 नवंबर को बूंदाबांदी के आसार
दिल्ली में 10 नवंबर को हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। प्रादेशिक मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक 13 नवंबर तक सुबह धुंध छाई रह सकती है। साथ ही, कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
बढ़ते प्रदूषण के बीच सम-विषम योजना को लेकर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच तकरार बढ़ गई है। दोनों ने एक-दूसरे पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उपराज्यपाल कार्यालय का कहना है कि दिल्ली में प्रभावी होने वाली योजनाओं में सम-विषम नहीं था। जबकि दिल्ली सरकार का कहना है कि अधिकारी इस योजना को लेकर एलजी को गलत जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं।
इस बारे में एलजी कार्यालय का कहना है कि योजना को लेकर सरकार ने झूठ बोलकर लोगों को गुमराह किया है। इस बारे में कोई निर्णय ही नहीं लिया गया। यह केवल लोगों व अदालतों का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। फाइल में स्पष्ट है कि इसे लागू करने के निर्णय को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने अनुमोदित नहीं किया। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सम-विषम योजना को स्थगित रखने के फैसले को अपनी मंजूरी दे दी। गोपाल राय और मुख्यमंत्री ने सम-विषम के अलावा अन्य सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
गोपाल राय चाहते थे कि कार्यान्वयन पर निर्णय विशेषज्ञों की सलाह के बाद लिया जाए। बाद में फाइल को उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए उपराज्यपाल सचिवालय भेजा गया। उपराज्यपाल सचिवालय ने इस योजना को लेकर सरकार की बयान पर एक पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा। इसमें कहा गया कि ग्रैप को लागू करवाने की शक्ति उपराज्यपाल के पास है। प्रदूषण को लेकर सख्ती की फाइल अक्टूबर से मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल कार्यालय में घूमती रही।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने फाइल पर लिखा कि सीएम दिल्ली से बाहर हैं और इस संबंध में प्रस्ताव तीन नवंबर को मुख्यमंत्री को दिखाए गए हैं और उन्होंने प्रस्ताव को मंजूरी दी है। चार नवंबर को इस संबंध में फाइल एलजी हाउस भेजी गई, जबकि सख्ती को लेकर आदेश के बारे में सार्वजनिक घोषणाएं पहले ही कर दी गईं और आदेश अगले दिन जारी हुआ। फाइल से स्पष्ट है कि इस योजना को लागू करने के लिए कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। एलजी ने सरकार के इस रवैये पर अपनी चिंता व्यक्त की है।