वहीं, कंधे का दूसरा हिस्सा भी जख्मी हो गया था। जांच करने पर पता चला कि पर्याप्त खून न होने के कारण बच्चे का हीमोग्लोबिन स्तर 14 की सामान्य सीमा से गिरकर चार हो गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि बाएं हाथ में खून ही नहीं जा पा रहा था। इस वजह से डॉक्टर उसके बाएं हाथ में नाड़ी तक का पता नहीं लगा पा रहे थे।
सर्जरी में शामिल डॉ. गोदारा ने कहा कि बच्चे की उम्र बहुत कम होने के कारण सर्जरी काफी मुश्किल और खतरे से भरी हुई थी। यदि जरा सी भी कोई गलती हो जाती तो बच्चे का हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। खून की आपूर्ति को जारी रखने के लिए पीड़ित के पैर से एक नस निकाली और उसे कनेक्टिंग आर्टरी के रूप में इस्तेमाल किया। नस की वजह से बच्चे की बांह दिव्यांग होने से बच गई। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चा आधा घंटा देरी से पहुंचता तो उसका हाथ नहीं बच पाता।