मृत डॉ. पल्लव
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नोएडा स्थित निजी अस्पताल के पैथ लैब में काम करने वाले एक डॉक्टर ने शनिवार को गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) परिसर में आठवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। यहां वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने से खुदकुशी के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस ने रविवार को पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। परिजन शव लेकर असम चले गए हैं। परिवार वाले इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पुलिस मृतक के दोस्तों से पूछताछ कर मामले की जांच में जुटी है।
डॉक्टर की पहचान पल्लव सहारिया (44) के रूप में हुई है। वह परिवार सहित जीटीबी अस्पताल परिसर स्थित स्टाफ क्वार्टर में आठवीं मंजिल पर रहते थे। परिवार में पत्नी डॉक्टर प्रियंका गोगई व दो बच्चे हैं। पल्लव मूलत: असम के गुवाहाटी के रहने वाले थे और वह नोएडा स्थित एक निजी अस्पताल के पैथ लैब में कार्यरत थे। उनकी पत्नी जीटीबी अस्पताल में ब्लड बैंक के प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं। इसकी वजह से उन्हें परिसर में स्टॉफ क्वार्टर मिला हुआ है।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर प्रियंका अस्पताल और दोनों बच्चे स्कूल चले गए थे। सुबह करीब साढ़े 10 बजे डॉक्टर पल्लव को भी लैब में जाना था, लेकिन उन्होंने आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉक्टर को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। छानबीन के दौरान पुलिस ने फ्लैट की तलाशी ली, लेकिन वहां कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
डॉक्टर के परिचितों ने बताया कि परिवार में किसी तरह का कोई विवाद नहीं था। उनका परिवार काफी खुशहाल था। पल्लव के इस कदम से परिवार वाले और उनके दोस्त भी हैरान हैं। मानसिक तनाव की वजह से खुदकुशी की बात सामने आ रही है, लेकिन किसी को नहीं पता है कि उन्हें किस प्रकार का मानसिक तनाव था।
एडिशनल एमएस की मौत की तरह न बन जाए पहेली
जीटीबी अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुप्रीटेंडेंट आरके चौधरी की 31 अगस्त 2016 को परिसर की पांचवीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इसके बाद मामले की जांच में इसे खुदकुशी करार दिया गया था। पल्लव के मामले में परिवार वालों ने कोई आरोप नहीं लगाया है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।