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अपने चहेतों के लिए भिड़े बीजेपी नेता, पार्टी में दरार

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दक्षिण दिल्ली नगर निगम के मेयर व डिप्टी मेयर के लिए नाम तय करने को लेकर भाजपा पार्षदों ही नहीं, बल्कि प्रदेश के नेताओं में घमासान मच गया है।
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अपने चहेतों को दोनों पद दिलाने पर अड़े नेताओं की वजह से पार्टी में दरार पड़ गई है। इसके चलते मेयर के निर्देश पर निगम सचिवालय ने मंगलवार को नामांकन दाखिल करने की तिथि आगे बढ़ा दी है।

अब 21 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे, जबकि पहले यह तिथि 16 अप्रैल थी।
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बसपा को लेकर भिडे़ नेता

डीएमसी एक्ट के अनुसार, इस वर्ष तीनों नगर निगम का मेयर पद अनुसूचित जाति के पार्षद को मिलेगा, जबकि डिप्टी मेयर पर किसी भी वर्ग के प्रतिनिधि को मैदान में उतारा जा सकता है।

भाजपा के पार्षदों व नेताओं में मेयर पद के लिए प्रदीप कुमार, कर्मवीर शेखर व खुशीराम को लेकर टकराव बना हुआ है। एक वर्ग कर्मवीर शेखर व प्रदीप कुमार की पैरवी कर रहा है जबकि दूसरा खुशीराम के पक्ष में हैं।

वहीं, भाजपा के अधिकतर नेता डिप्टी मेयर पद बसपा को देने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि जब वे बहुमत के करीब हैं तो अपने पार्षद को ही चुनाव लड़ाया जाए।
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कांग्रेस ने भी खेला दांव

उधर, कांग्रेस दोनों पदों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन नामों का फैसला भाजपा के प्रत्याशी तय होने के बाद ही करेगी। विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने मंगलवार को अपने पार्षदों के साथ बैठक करके विचार विमर्श किया।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव 29 अप्रैल को होगा। भाजपा निर्दलीय व अन्य पार्षदों के समर्थन के चलते बहुमत के करीब पहुंच पाई है।

मेयर पद पर जीत के लिए 58 वोट चाहिए। तीन पार्षदों के विधायक बनने पर तीन वार्ड खाली हो गए हैं। इस तरह अब जीत के लिए 55 वोट की आवश्यकता है।
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