भारत में उस आदर्श पुलिस अधिकारी की कहानी किसी की भी जुबानी सुनी जा सकती है जिसमें बताया जाता है कि कैसे एक निर्भीक और ईमानदार महिला आईपीएस अधिकारी ने 5 अगस्त 1982 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार को उठवा लिया क्योंकि वह नो पार्किंग एरिया में खड़ी थी।
इस कहानी ने देश भर की महिलाओं को प्रेरित किया क्योंकि ऐसा करने वाली आईपीएस अधिकारी असल में भारत की पहली महिला थी जो भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुई थी। उनके इस बहादुरी भरे काम ने आज उन्हें दिल्ली में सीएम पद का उम्मीदवार तक बना दिया है।
मंगलवार शाम एनडीटीवी के इंटरव्यू में किरण बेदी ने कैमरे के सामने जो स्वीकार किया वह चौंकाने वाला है। किरण बेदी ने कहा कि जो कार उठाई गई वह न तो इंदिरा गांधी की कार थी और न ही पीएम के काफिले में वह कार शामिल थी।
अब यह बात सार्वजनिक है लेकिन, किरण बेदी ने छात्रों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पर एक ही झूठ कितनी बार बोला है इसे जानकर आप चौंक जाएंगे। आगे पढ़िए उनके झूठ की पूरी कहानी...
ट्विटर पर भी किरण ने लिखा वही झूठ!
जिस कार को उठाया गया वह पीएम हाउस की कार थी जिसे तत्कालीन ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने उठवाया था। मंगलवार के पहले तक किरण बेदी खुद इस बात का दावा करती रहीं थीं कि उन्होंने प्रधानमंत्री की कार को उठवाया था।
यह बात उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट में लिखे बायोडेटा में भी लिख रखा था। हफिंग्टन पोस्ट ने अपने एक लेख में किरण्ा बेदी के उस ट्विटर बायो को भी शेयर किया है जिसे आप नीचे देख सकते हैं।
हफिंग्टन पोस्ट ने अपने इसी लेख में टेड टॉक (TED talk) नामक एक ग्लोबल कांफ्रेंस का 2010 का वीडियो भी शेयर किया है।
'मैं दावे के साथ कहती हूं कि ऐसा आखिरी बार हो रहा है'
इस वीडियो में दुनिया भर के लोगों के सामने किरण बेदी कह रही हैं कि आपको कैसा लगेगा जब आपको यह सुनाई पड़े कि प्रधानमंत्री की कार उठा ली गई है।
इस वीडियो में किरण बेदी कह रही हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री की कार को पार्किंग टिकट दिया गया। और मैं दावे के साथ कह रही हूं कि ऐसा आखिरी बार हो रहा है। ऐसा भारत में दोबारा कभी नहीं होगा।
किरण बेदी कहती हैं कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं अन्याय के खिलाफ बेहद संवेदनशील हूं और न्याय की समर्थक हूं। आगे सुनिए किरण्ा बेदी का पूरा भाष्ाण्ा।
निर्मल सिंह को क्यों नहीं मिला क्रेडिट
रवीश कुमार ने भी अपने ब्लॉग में इस बात का जिक्र करते हुए लिखा कि आखिर कार उठाने वाले एसआई निर्मल सिंह को इसका क्रेडिट क्यों नहीं दिया गया।
हालांकि वीकीपीडिया में किरण बेदी सर्च करने पर आपको लिखा मिलेगा कि - 5 अगस्त 1982 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की एंबेसडर कार (DHI1817) को एसआई निर्मल सिंह ने उठवा लिया था।
कार कनॉट प्लेस के यूसुफजई मार्केट के बाहर गलत तरीके से पार्क की गई थी। इस मामले के बाद किरण बेदी और उनके सीनियर अशोक टंडन ने निर्मल सिंह का पूरा समर्थन किया।
भोपाल में छात्रों से भी झूठ बोला
इस बारे में अभी हाल ही में फर्स्टपोस्ट ने भी एक स्टोरी प्रकाशित की थी जिसमें लिखा गया कि 2010 में भोपाल में छात्रों से बात करते हुए किरण बेदी ने कहा कि मैं जानती थी कि मेरा ट्रांसफर हो जाएगा लेकिन मैंने तय किय कि मैं वही करूंगी जो सही है।
उन्होंने छात्रों को बताया कि वही हुआ जो सबके साथ होता है। अगले ही दिन मुझे गोव ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन इसके बावजूद मैं हमेशा वही करती रही जो सही था। इसका कारण है कि मैं उस नींव पर खड़ी हूं जिसका आधार ज्ञान और मेरे संस्कार और मूल्य हैं।
हालांकि फर्स्टपोस्ट ने इसी लेख के साथ बेदी के ही वेबसाइट के दो लेख को लिंक कर रखा था। इस लेख में साफ लिखा है कि किरण बेदी का गोवा ट्रांसफर नहीं किया गया। बल्कि नवंबर दिसंबर 1982 के एशियन गेम्स के दौरान दिल्ली के ट्रैफिक को संभालने की जिम्मेदारी किरण बेदी को ही दी गई।
पूरा लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...http://goo.gl/FWLCqU