मंगलवार को देवशयनी एकादशी होने के साथ ही सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग गया है। मंगलवार से आगामी करीब चार माह तक किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे।
पंडित दुलीदत्त कौशिक के अनुसार भगवान विष्णु लक्ष्मी जी सहित चार महीनों के लिए पाताल लोक में निवास करने चले जाते हैं। इसलिए इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं होते हैं।
इस एकादशी को हरिशयनी या देवशयनी एकादशी भी कहते हैं। इसे चतुर्मास भी कहा जाता है। दुलीदत्त कौशिक के अनुसार इन चार महीनों में अन्य दिव्य शक्तियां भी आध्यात्मिक जगत में प्रस्थान कर जाती है और सिर्फ भगवान शंकर की तमोगुणी संहारक शक्तियां ही पृथ्वी पर रह जाती हैं।
ऐसे में शुभ कार्य नहीं करने चाहिए, बल्कि सतगुण को अपनाना चाहिए और जप, पूजा, ध्यान, साधना, दान पुण्य, हवन आदि करना चाहिए। इन महीनों में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं।
इन चार मास में तपस्वी कहीं भ्रमण नहीं करते। एक ही स्थान पर रहकर सत्संग करते हैं। इस समय कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।