एडवोकेट और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए भारतीय विमानों पर वीटी कोड बदलने की मांग की है। भाजपा नेता का कहना है कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी ब्रिटिश शासकों द्वारा दिया वीटी कोड भारतीय विमानों पर अंकित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए भारतीय विमानों पर पंजीकरण कोड (कॉल साइन) के साथ लिखे ‘वीटी’को बदलने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि आजादी के 75 साल बाद भी वीटी (विक्टोरियन/वायसराय टेरिटरी) का इस्तेमाल गुलामी की निशानी का प्रतीक है।
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याचिकाकर्ता एडवोकेट और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा, 1929 में ब्रिटेन ने अपने उपनिवेशों के लिए वीटी साइन निर्धारित किया था लेकिन अब भारत एक संप्रभु राष्ट्र है न कि वायसराय क्षेत्र। उपाध्याय ने कहा, हमारे पीएम एयर इंडिया वन बी747-437 से विदेश यात्रा पर जाते हैं, जिस पर कॉल साइन वीटी-ईवीबी अंकित है जबकि वे एक स्वतंत्र राष्ट्र के लीडर हैं, वायसराय टेरिटरी के नहीं। भाजपा नेता का कहना है, अब तक पंजीकरण कोड बदलने को लेकर हुई कोशिशें बेनतीजा रही हैं।
2004 में उड्डयन मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) से संपर्क किया था लेकिन आज तक कोई फैसला नहीं हुआ। आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी ब्रिटिश शासकों द्वारा दिया वीटी कोड भारतीय विमानों पर अंकित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। लिहाजा, कोर्ट केंद्र को इसे बदलने का आदेश दे।
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93 साल बाद भी यही कोड
चीन, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने स्वतंत्रता के फौरन बाद अपना कॉल साइन बदल लिया लेकिन भारत में 93 साल बाद भी यही कोड बना हुआ है। वीटी कोड भारतीयों के लिए गर्व नहीं बल्कि शर्म की बात है।