अकेलापन नहीं हो रहा दूर
शंकर हाथी का साथी लाने के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन पुरजोर कोशिशें कर रहा है। जिम्बाब्वे से आया शंकर वर्ष 2005 में अपने साथी बॉम्बेई की मौत के बाद से बाड़े में अकेला है। इससे वह कई बार मायूस हो जाता है तो कभी-कभी उसे संभालना भी मुश्किल हो जाता है। देश में केवल दिल्ली व मैसूर चिड़ियाघर में ही दक्षिण अफ्रीकन नर हाथी हैं। वहीं, यहां इसी प्रकार दो मादा गैंडा, नर जगुआर व नर शुतुरमुर्ग हैं। यह सभी वर्षों से अपने साथी की तलाश में हैं। साथ ही, मिस्र गिद्ध व सैंड बोआ समेत सांप भी अकेला है।
चिड़ियाघर में जो वन्य जीव नहीं है और जिन्हें साथी की तलाश है, उनके लिए प्रबंधन कार्य कर रहा है। जल्द ही मादा गैंडा को साथी मिल सकता है। शंकर के साथी के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी बातचीत चल रही है। -आकांक्षा महाजन, निदेशक, चिड़ियाघर
9 वर्ष से नहीं है जिराफ और 14 वर्ष से जेब्रा
चिड़ियाघर में पहले अंकित नाम का जिराफ था, लेकिन, 2015 में उसकी हार्ट अटैक और किडनी फेल होने के कारण उसकी मौत हो गई थी। यह वर्ष 1990 में कोलकाता से लाए गए जिराफ जोड़े की संतान था। इसके बाद से दिल्ली चिड़ियाघर में जिराफ की कमी महसूस की जा रही है। यहां 14 वर्ष से जेब्रा नहीं है। पांच साल पहले चिंपांजी रिटा की मौत हो गई थी। यह देश की सबसे बूढ़ी मादा चिंपांजी चिड़ियाघर के बाड़े में ही थी। उसे देश की सबसे बूढ़ी चिंपांजी होने का दर्जा हासिल है। चिड़ियाघर में सफेद बाघ से लेकर बंगाल बाघ के बाड़े के बाहर दर्शकों की अधिक संख्या देखने को मिलती है। उनकी अठखेलियां दर्शकों को वहां कुछ देर रुकने के लिए मजबूर करती हैं। विशेष रूप से बच्चे और महिलाओं को इन बाघों का कल्चर खूब लुभाता है।