दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के आठ कॉलेजों द्वारा 11 पाठ्यक्रमों के लिए 100 फीसदी कट ऑफ घोषित करने बाद डीयू शिक्षकों ने विभिन्न बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाया है। कुछ ने कहा कि इसका समाधान एंट्रेंस टेस्ट नही है। इससे कोचिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। कुछ ने अच्छी गुणवत्ता वाले संस्थान खोलने पर जोर दिया है।
डीयू वर्तमान में कुल 13 स्नातक और सभी स्नातकोत्तर, एमफिल, पीएचडी के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की मदद से प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। इस साल सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया था। लेकिन अभी शिक्षा मंत्रालय से इसकी मंजूरी लंबित है। ऐसे में यह एंट्रेंस अगले टेस्ट साल से शुरू होने की संभावना है।
डीयू कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य राजेश झा ने कहा कि बोर्ड परीक्षा प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी है और कट-ऑफ को पूरा करने वाले सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश दिया जाता है। वह कहते हैं कि बीते साल कुछ कॉलेज के कुछ कोर्सेज में सीटों से अधिक दाखिले हो गए थे। ऐसे में कॉलेजो ने इससे बचने के लिए 100 फीसदी कट ऑफ की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे में डीयू की प्रणाली में सुधार का आह्वान करने के बजाय, बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि इतने सारे छात्र ऐसे अंक प्राप्त कर रहे हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली का उद्देश्य विफल हो रहा है। वह डीयू में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में नही है। प्रवेश परीक्षा होने से कोचिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। अन्य शिक्षकों ने गुणवत्ता पूर्वक संसथान खोलने की सिफारिश की है। इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 2.87 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया है।