ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत शुक्रवार को वर्चुअल दिल्ली ईवी फोरम में शामिल हुए। दोनों मंत्रियों ने सरकार की ईवी पॉलिसी के मजबूत कार्यान्वयन के लिए सभी हितधारकों के बीच सहयोग और समन्वय बनाने पर बल दिया। यह कार्यक्रम दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस पॉलिसी के तहत 2024 तक दिल्ली की सड़कों पर 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
सत्येंद्र जैन ने कहा कि ईवी हमारा भविष्य है और हमें अपने पर्यावरण और समाज की सुरक्षा के लिए इस भविष्य की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के अभियान और जागरूकता के पहलुओं को जोरदार तरीके से चलाना चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं में इसके प्रति विश्वास पैदा हो सके। इससे इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की मांग में वृद्धि होने में मदद मिलेगी।
उन्होंने नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के साथ-साथ चार्जिंग के लिए उचित बुनियादी ढांचा तैयार करना बताया। जैन ने कहा कि ईवी वाहनों की बिक्री तभी बढ़ेगी, जब जागरूकता होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत कम करने के लिए मिलकर काम करना होगा, जिससे उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी नीतियां बनाने की दिशा में काम कर रही है, जो पर्यावरण के अनुकूल और सतत विकास मॉडल पर केंद्रित भी हो।
वहीं, परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि कोविड महामारी के कारण सरकार पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाई, लेकिन सरकार 2024 की समय सीमा तक 25 फीसदी ईवी वाहनों के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन भी ईवी में परिवर्तित होने जा रहा है।
कैलाश गहलोत ने कहा कि दिल्ली में आने वाले कुछ महीनों में पांच हजार इलेक्ट्रिक ऑटो और 300 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। साथ ही राजधानी में आवश्ययक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए समझौता ज्ञापनों पर तेजी से काम हो रहा है। दिल्ली सरकार ईवी पॉलिसी के पहले वर्ष के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने पर भी काम कर रही है। 25 फीसदी लक्ष्य में से तीन फीसदी का लक्ष्य कोविड महामारी होने के बावजूद प्राप्त कर लिया गया है।