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Delhi : लोकसभा चुनाव में गठबंधन को एक ही बार हो पाई जीत नसीब, 1984 में पहली बार मिलाया था विपक्षियों ने हाथ

Wed, 28 Feb 2024 05:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में अब तक कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन हुआ था। पहली बार भाजपा के खिलाफ गठबंधन हुआ है। दो बार भाजपा ने लोकदल और जनता दल के साथ कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन किया था। 
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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राजधानी में लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने वाले दलों को एक बार ही जीत नसीब हुई है, जबकि एक बार करारी हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली में अब तक कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन हुआ था। पहली बार भाजपा के खिलाफ गठबंधन हुआ है। दो बार भाजपा ने लोकदल और जनता दल के साथ कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन किया था। 

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पहली बार कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ गठबंधन किया है। लिहाजा इस गठबंधन के जीत व हार के बारे में कयासों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि कांग्रेस व आप अपनी जीत का दावा कर रही हैं। वहीं, भाजपा गठबंधन पर सवाल खड़े कर रही है।

1984 में पहली बार हुआ था गठजोड़ 
राजधानी में पहली बार 40 साल पहले वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों ने गठबंधन किया था। अंतिम बार वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ था। दोनों बार गठबंधन करने वाली भाजपा ने सात में से पांच सीट अपने पास रखी थीं, जबकि साथी दलों को दो सीट दी थी। भाजपा ने दोनों बार बाहरी दिल्ली व पूर्वी दिल्ली सीट बंटवारे में दी थी और शहरी क्षेत्र की सीटें अपने पास रखी थी। वहीं, इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के बीच चार-तीन के फार्मूले के तहत गठबंधन हुआ है। दरअसल दोनों पार्टियों का पूरी दिल्ली में जनाधार माना जाता है। इस कारण उन्होंने सभी चुनावों के मत प्रतिशत को ध्यान रखते हुए आपस में सीटें बांटी हैं, जबकि भाजपा का शहरी क्षेत्र में जनाधार माना जाता था और वह शहरी क्षेत्र की सीटें अपने पास रखती थी। देहात की दोनाें सीटें बंटवारे में दे देती थी।
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पहली बार गठबंधन का खाता भी नहीं खुला था
भाजपा ने प्रथम बार वर्ष 1984 में चौधरी चरणसिंह की पार्टी लोकदल के साथ गठबंधन किया था। उस दौरान भाजपा नेे बाहरी दिल्ली व पूर्वी दिल्ली सीट लोकदल को दीं थीं, हालांकि चौ. चरणसिंह ने पूर्वी दिल्ली सीट अपनी साथी जनता पार्टी को दे दी थी। इस चुनाव में सातों सीटों पर गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इंदिरा गांधी की लहर में कांग्रेस ने सातों सीटों पर विजय हासिल की थी और भाजपा के दिग्गज नेता सिकंदर बख्त, प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा व मदनलाल खुराना जीत से कोसों दूर रह गए थे।

1989 में गठबंधन पांच सीटें जीतने में कामयाब रहा था
वर्ष 1989 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को छोड़कर लोकदल व जनता पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस से वीपी सिंह के नेतृत्व में अलग हुए धड़े ने जनता दल का गठन किया था। भाजपा ने जनता दल के साथ मिलकर पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली में भी गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। राजधानी में गठबंधन कांग्रेस का सूपड़ा साफ तो नहीं कर सका था, लेकिन वह पांच सीटों पर जीतने में कामयाब रहा था। इस चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता जगदीश टाइटलर व धर्मदास शास्त्री हार गए थे। 

  • भाजपा ने नई दिल्ली, दिल्ली सदर, दक्षिण दिल्ली व करोल बाग सीट पर जीती थी और उसके दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा व मदनलाल खुराना जीते थे। जबकि बाहरी दिल्ली से जनता दल के दिग्गज नेता चौ. तारीफ सिंह नेे अपनी पार्टी का खाता खोला था। कांग्रेस ने पूर्वी दिल्ली में जनता दल व करोल बाग में भाजपा को हराकर जीत हासिल की थी। इन सीटों पर कांग्रेस के दिग्गज नेता एचकेएल भगत व जयप्रकाश अग्रवाल जीतने में कामयाब रहे थे।
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