मनीष सिसोदिया ने बताया कि इसे राज्य विश्वविद्यालय के तौर पर बनाया जाएगा। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षा के साथ खेलों में शोध भी होंगे। संबंधित खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट खेल प्रभाग बनेंगे। यह कोचिंग से लेकर दूसरी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा।
विश्वविद्यालय के स्कूलों में नामांकन लेने वालों छात्रों को तो कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन सामान्य स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी। परीक्षा का मानक भी विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी। मनीष सिसोदिया का कहना है कि यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों की डिग्री दूसरे विश्वविद्यालयों की डिग्री के समकक्ष होगी।
1997 से ही चल रही है स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की कवायद
दिल्ली में स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय बनाने की लंबे समय से योजना है। 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के समय में जमीन का अधिग्रहण भी किया गया था। लेकिन मामला अदालत में जाने से अधर में लटक गया। वहीं, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने बजट भाषण में इस विश्वविद्यालय के लिए दस करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। साथ ही इसकी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी भी गठित हुई थी। कमेटी ने सितंबर 2017 में सरकार को ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश की थी। कुछ संशोधन के साथ जनवरी 2018 में फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार हो गई थी।