नव्या ने कहा, आठ अप्रैल को मम्मी पॉजीटिव आई थीं। हम सबने मिलकर उनका ख्याल रखा। हम लोग भी आइसोलेट हो चुके थे लेकिन मम्मी की तबियत पता नहीं क्यों, खराब होती जा रही थी।
अचानक से ऑक्सीजन का लेवल 60 तक गिर गया और उनकी सांसें उखड़ने लगीं तो हम जयपुर गोल्डन अस्पताल पहुंचे। यहां पहले बिस्तर नहीं थे। बड़ी मुश्किल में और वहां लोगों के हाथ जोड़ने के बाद बिस्तर मिला लेकिन अगले दिन डॉक्टरों ने कह दिया प्लाज्मा लेकर आओ।
अब हम प्लाज्मा के लिए दौड़ लगाने लगे। यह मुश्किल घड़ी भी हमने पार कर ली और मां के ऑक्सीजन स्तर में सुधार आने लगा। डॉक्टर ने खुद बताया था कि उनका ऑक्सीजन लेवल 98 हो चुका है लेकिन रात में फोन करके कहा कि ऑक्सीजन का इंतजाम कर लो।
रात 10:50 बजे गार्ड ने हमें फोन किया था और फिर जब हम अस्पताल पहुंचे तो रात 11:30 बजे मौत होने की जानकारी मिली। उस रात हमें कुछ नहीं बताया।
बस चारों ओर लोग भागदौड़ कर रहे थे और यही कह रहे थे कि ऑक्सीजन खत्म है लेकिन सुबह जब शव लेने अस्पताल पहुंचे तब पता चला कि उनकी मां की मौत ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हुई। ऑक्सीजन नहीं मिलने से उन्हें हार्ट अटैक आया।