उच्च न्यायालय ने उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के एक अन्य मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा आरोपी की एक अन्य जमानत याचिका पर दूसरी अदालत में सुनवाई लंबित है ऐसे में यह मामला भी उनके पास स्थानांतरित किया जाए।
न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने कहा कि आरोपी की जमानत संबंधी एक आवेदन पर न्यायमूर्ति योगेश खन्ना सुनवाई कर रहे हैं। ऐसे में यह याचिका भी उनके समक्ष छह अगस्त को सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दी जाए। न्यायमूर्ति खन्ना दंगों से जुड़े अन्य मामलों में हुसैन की अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं।
आरोपी हुसैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ करीब 11 मामले विभिन्न थानों में दंगों को लेकर दर्ज किए गए हैं। इनमें से तीन मामले दयालपुर थाने में दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि सभी मामलों में एक समान आरोप लगाए गए हैं। माथुर ने अदालत से आग्रह किया कि इस याचिका को भी अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ा जाए जो न्यायमूर्ति खन्ना के समक्ष लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सभी मामलों में एक ही आरोप हैं कि मैं दंगो का मास्टरमाइंड हूं और लोग मेरे घर पर इकट्ठे हुए। इन मामलों में सभी को जमानत मिल चुकी है।
अभियोजन पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता डीके भाटिया ने वर्तमान जमानत याचिका को दूसरे जज के पास भेजने का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपी की भूमिका भी अन्य मामलों से अलग है।
संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच 24 फरवरी को उत्तरपूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा ने सांप्रदायिक झड़पों का रूप ले लिया था। उसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी व सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।