देश की राजधानी में रोज पांच से ज्यादा महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। उनके अपने ही अस्मत के दुश्मन बने हुए हैं। वर्ष 2018 में सामने आए मामलों में केवल ढाई फीसदी वारदात में अनजान लोग शामिल थे। हालांकि यह आंकड़ा पिछले सालों में ज्यादा रहा था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, राजधानी में इस वर्ष अन्य वर्षों की तुलना में दुष्कर्म की घटनाओं में कमी आई है। कमी महज चंद मामलों की है। वर्ष 2016 में जहां दुष्कर्म के 2065 मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्ष 2017 में 2059 मामले सामने आए। जबकि वर्ष 2018 में 2043 मामले दर्ज किए गए।
दुष्कर्म की इन घटनाओं में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं और बच्चियों की अस्मत लूटने में उनके जानकार व करीबी ही सबसे आगे रहे। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, दुष्कर्म के 888 मामलों में पीड़ितों के दोस्त व पारिवारिक मित्र शामिल रहे। जबकि 332 पड़ोसी, 246 रिश्तेदार, 59 मालिक व सहकर्मी, 467 अन्य पहचान के लोग हैं। 51 ऐसे मामले सामने आए, जिसमें अनजानों ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
एक चौंकाने वाली बात यह है कि इस साल अनजान लोगों के दुष्कर्म करने की घटनाओं में भी काफी कमी आई है। वर्ष 2016 में जहां 3.57 फीसदी लोग इन वारदातों में शामिल रहे, वहीं 2017 में यह 3.36 फीसदी तथा इस वर्ष महज 2.5 फीसदी ही ऐसे अनजान लोग थे, जिन्होंने महिलाओं व बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। वहीं, राजधानी में महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं में पिछले साल की तुलना में 3.05 फीसदी की कमी आई है। पिछले साल छेड़छाड़ की 3275 घटनाएं हुई, वहीं इस वर्ष 3175 मामले दर्ज किए गए।