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Delhi NCR News: दिल्ली दंगा केस में जज बदलने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश को बदलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से अनुमति मांगी है। पुलिस का आरोप है कि न्यायाधीश द्वारा पिछले साल पारित एक अंतरिम आदेश के कारण ट्रायल कोर्ट में चार्ज पर फैसला होने में देरी हो रही है।



मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने 12 सितंबर, 2024 को एक आदेश पारित करते हुए ट्रायल कोर्ट से कहा था, आरोप तय करने पर बहस तो जारी रखी जा सकती है, लेकिन कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा। हालांकि इस मामले में न्यायमूर्ति कृष्णा ने 8 जनवरी, 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अब तक उस पर फैसला नहीं आया है। पुलिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, फैसला सुरक्षित रखने के तीन महीने के भीतर जजमेंट दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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अधिवक्ता ने पीठ को बताया, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अगर निर्धारित समय में फैसला नहीं दिया जाता है, तो पक्षकार केस ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस मामले में सह-आरोपी अब यह कहकर जमानत मांग रहे कि हाईकोर्ट के स्टे के कारण ट्रायल में देरी होगी, जिससे न्याय प्रभावित हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने पुलिस के इस अनुरोध पर कहा, मुझे केस का ब्यौरा दीजिए। मैं प्रशासनिक पक्ष से देखता हूं कि मेरे लिए क्या संभव है। गौरतलब है कि देवांगना कालिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीएए और एनआरसी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की वीडियो रिकॉर्डिंग और पुलिस के व्हाट्सएप चैट की मांग की थी। कालिता 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपियों में से एक हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट में इस केस में आरोप तय करने पर सुनवाई 5 सितंबर, 2024 से शुरू हुई थी। इस मामले में उमर खालिद, शर्जील इमाम, सफूरा जरगर, नताशा नरवाल, आसिफ इकबाल तन्हा, ताहिर हुसैन समेत कई प्रमुख आरोपी हैं। दिल्ली पुलिस ने इन सभी के खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधान लगाए हैं।
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