लंपी वायरस के मद्देनजर दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने शनिवार को संबंधित विभागों की बैठक बुलाई है। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में पशुओं को बीमारी से बचाने की तैयारियों पर चर्चा होगी।
जूनोटिक नहीं है बीमारी
लंपी स्किन बीमारी पशुओं की एक वायरस बीमारी है। यह बीमारी जूनोटिक नहीं है। यानी पशुओं से मनुष्य में नहीं फैलती है। इससे प्रभावित अधिकतर पशु दो से तीन सप्ताह में स्वस्थ हो जाते हैं। लेकिन दुध उत्पादन में कमी कई सप्ताह बनी रहती है। इसमें मृत्यु दर 1 प्रतिशत रहती है। इसकी संक्रामकता 10 से 20 प्रतिशत है।
यह है लंपी वायरस के लक्षण
लंपी वायरस से प्रभावित पशु को बुखार आता है। इसके पूरे शरीर में गांठ, नरम छाले पड़ जाते है। मुंह से लार निकलती है। यह पशुओं में एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। यह मच्छर-मक्खी से भी फैलती है।
2019 में बांग्लोदश में सामने आई
लंपी स्किन की बीमारी जुलाई 2019 में एशिया में सबसे पहले बांग्लोदश में सामने आई। इसी साल पश्चिम बंगाल, ओडिशा में इसके केस मिले। इस साल अंडमान-निकोबार समेत पश्चिम और उत्तरी राज्यों में फैली। मध्य प्रदेश में इसके गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आने की बात बताई जा रही है।