एनएचईवी के परियोजना निदेशक अभिजीत सिन्हा ने बताया कि ट्रायल के दौरान डीजल बसों की तुलना में एक सीट का किराया, एक ई-कार या एसयूवी का एक दिन का किराया, एक किमी तक ई-हाईवे तैयार करने की लागत और एक साल में इसपर चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी का अध्ययन किया जाएगा।
अब किराए पर इलेक्ट्रिक वाहन भी मिलेगा। तय शुल्क का भुगतान कर ई-वाहन चलाते हुए सफर का आनंद ले सकेंगे। इसकी शुरुआत दिल्ली-जयपुर ई-हाईवे पर शुरू होने जा रही है। यूरोपीय देशों की तर्ज पर मिलने वाली इस सुविधा की शुरुआत से पहले हाईवे की जियोफेंसिंग की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति किराये की कार लेकर भागना चाहे तो भी तयशुदा सड़क के दायरे से बाहर निकलते ही कार लॉक हो जाएगी।
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नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल (एनएचईवी) ने इंडिया गेट के सामने से दिल्ली-जयपुर हाईवे पर दो ई-बसों को ट्रायल रन के रवाना किया। इससे पहले दिल्ली-आगरा के बीच ई बसों का ट्रायल किया गया था। एनएचईवी के परियोजना निदेशक अभिजीत सिन्हा ने बताया कि ट्रायल के दौरान हाईवे पर चार पहलुओं का अध्ययन होगा। इसके तहत डीजल बसों की तुलना में एक सीट का किराया, एक ई-कार या एसयूवी का एक दिन का किराया, एक किमी तक ई-हाईवे तैयार करने की लागत और एक साल में इसपर चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी का अध्ययन किया जाएगा।
अलग से बनाया जाएगा हाईवे
एनएचईवी के परियोजना निदेशक ने कहा कि ई-वाहनों के लिए अलग हाईवे तैयार किया जा रहा है। इसके तहत चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं और कभी भी रास्ते में अगर वाहन में कोई खराबी आती है तो 30 मिनट के अंदर वहां मैकेनिक उपलब्ध रहेगा। चूंकि देश में ई वाहनों की मरम्मत का काम सभी नहीं जानते हैं। कैब कंपनियों को ई-हाइवे पर चलने के लिए वाहन खरीदने पर 30 फीसदी की रियायत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च राशि की तीन साल में वापसी की सुविधा भी होगी। पिछले ट्रायल रन की रिपोर्ट सौंप दी गई है।