फेज-4 के तीनों कॉरिडोर के स्टेशनों पर पीएसडी लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। भूमिगत मेट्रो स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और सुरंगों से होकर अचानक पहुंचने वाली हवा को भी रोकना संभव होगा। इससे अचानक तापमान में गिरावट या वृद्धि नहीं होगी। इससे ऊर्जा की भी बचत होगी। शेष 27 एलिवेटेड स्टेशनों पर लगने वाले पीएसडी की ऊंचाई एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की तुलना में करीब 50 फीसदी होगी।
हवा की आवाजाही को पीएसडी से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी
एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की तर्ज पर भूमिगत स्टेशनों पर पूरी ऊंचाई के स्क्रीन डोर लगेंगे। शेष स्टेशनों पर कम ऊंचाई (करीब 50 फीसदी) के पीएसडी लगाए जाएंगे। यात्रियों की सुरक्षा, हवा की आवाजाही को पीएसडी से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे ऊर्जा की कम खपत के साथ परिचालन की लागत भी कम होगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इसके लिए टेंडर जारी किया है। मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के दौरान प्लेटफॉर्म पर पीएसडी की सुविधा सभी स्टेशनों पर होगी।
मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच अवरोधक के तौर पर करते हैं काम
पीएसडी दो तरह के होते हैं। प्लेटफॉर्म स्क्रीन के दरवाजे पूर्ण ऊंचाई और आधी ऊंचाई के होते हैं। मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच अवरोधक के तौर पर कार्य करते हैं। मेट्रो के प्लेटफॉर्म पर रुकने के बाद ही पीएसडी खुलते हैं। इससे मेट्रो परिचालन के दौरान न तो कोई गलती से ट्रैक पर गिर सकता है और न ही छलांग लगा पाएगा।
पूर्ण ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर को स्वचालित प्लेटफॉर्म गेट के रूप के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे मेट्रो यात्रियों की सुरक्षा के और पुख्ता इंतजाम हो जाते हैं। आधी ऊंचाई के पीएसडी से भी यात्रियों को ट्रैक पर गिरने से रोकना संभव हो सकता है। दुनिया के कई देशों की मेट्रो में पीएसडी का इस्तेमाल किया जा रहा है।