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Delhi Metro: अब मेट्रो ट्रैक पर गिरने का खतरा व छलांग लगाने की नहीं होगी गुंजाइश, पुख्ता किए जाएंगे इंतजाम

Sat, 24 Sep 2022 07:55 AM IST
अनुराग सक्सेना सर्वेश कुमार, नई दिल्ली

सार

प्लेटफॉर्म और मेट्रो के बीच सुरक्षा कवच के तौर पर सभी 45 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) लगाए जाएंगे। मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच पीएसडी बैरिकेड के तौर पर काम करेंगे। खास बात ये होगी कि मेट्रो के पहुंचने के बाद ही गेट खुलेंगे या बंद होंगे।
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दिल्ली मेट्रो - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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मेट्रो फेज-4 के सभी स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम और अधिक पुख्ता किए जाएंगे। मेट्रो की आवाजाही के दौरान संतुलन बिगड़ने से ट्रैक पर गिरने का खतरा नहीं होगा। आत्महत्या की आशंका भी नहीं रहेगी, क्योंकि ट्रैक पर छलांग लगाने की गुंजाइश नहीं होगी।

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प्लेटफॉर्म और मेट्रो के बीच सुरक्षा कवच के तौर पर सभी 45 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) लगाए जाएंगे। मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच पीएसडी बैरिकेड के तौर पर काम करेंगे। खास बात ये होगी कि मेट्रो के पहुंचने के बाद ही गेट खुलेंगे या बंद होंगे। दुनिया के कई देशों में मेट्रो यात्रियों की सुरक्षा के लिए पीएसडी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मेट्रो फेज-4 के तीन कॉरिडोर पर तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। एयरोसिटी से तुगलकाबाद, मजलिस पार्क से मौजपुर और जनकपुरी पश्चिम से आरके आश्रम के बीच तीन कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। तीनों कॉरिडोर के तैयार होने से दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ सफर में सुरक्षा के इंतजाम भी और पुख्ता होंगे।

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फेज-4 के तीनों कॉरिडोर के स्टेशनों पर पीएसडी लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। भूमिगत मेट्रो स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और सुरंगों से होकर अचानक पहुंचने वाली हवा को भी रोकना संभव होगा। इससे अचानक तापमान में गिरावट या वृद्धि नहीं होगी। इससे ऊर्जा की भी बचत होगी। शेष 27 एलिवेटेड स्टेशनों पर लगने वाले पीएसडी की ऊंचाई एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की तुलना में करीब 50 फीसदी होगी।

हवा की आवाजाही को पीएसडी से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी

एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की तर्ज पर भूमिगत स्टेशनों पर पूरी ऊंचाई के स्क्रीन डोर लगेंगे। शेष स्टेशनों पर कम ऊंचाई (करीब 50 फीसदी) के पीएसडी लगाए जाएंगे। यात्रियों की सुरक्षा, हवा की आवाजाही को पीएसडी से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे ऊर्जा की कम खपत के साथ परिचालन की लागत भी कम होगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इसके लिए टेंडर जारी किया है। मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के दौरान प्लेटफॉर्म पर पीएसडी की सुविधा सभी स्टेशनों पर होगी।

मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच अवरोधक के तौर पर करते हैं काम

पीएसडी दो तरह के होते हैं। प्लेटफॉर्म स्क्रीन के दरवाजे पूर्ण ऊंचाई और आधी ऊंचाई के होते हैं। मेट्रो और प्लेटफॉर्म के बीच अवरोधक के तौर पर कार्य करते हैं। मेट्रो के प्लेटफॉर्म पर रुकने के बाद ही पीएसडी खुलते हैं। इससे मेट्रो परिचालन के दौरान न तो कोई गलती से ट्रैक पर गिर सकता है और न ही छलांग लगा पाएगा।

पूर्ण ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर को स्वचालित प्लेटफॉर्म गेट के रूप के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे मेट्रो यात्रियों की सुरक्षा के और पुख्ता इंतजाम हो जाते हैं। आधी ऊंचाई के पीएसडी से भी यात्रियों को ट्रैक पर गिरने से रोकना संभव हो सकता है। दुनिया के कई देशों की मेट्रो में पीएसडी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर से ऐसे मिलेगी सुरक्षा

  • कई बार गलती से ट्रैक पर अचानक गिरने का खतरा रहता है। पीएसडी की सुविधा से ट्रैक पर गिरने का जोखिम नहीं रहेगा। ट्रैक पर छलांग लगाकर आत्महत्या की भी कम घटनाएं होंगी।
  • मेट्रो के स्टेशन पहुंचने से अक्सर हवा के झोंके महसूस होते हैं, इससे प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री असंतुलित महसूस करने लगते हैं।
  • मेट्रो की तेज रफ्तार से गुजरने के कारण हवा के तेज झोंके से तापमान में अचानक बदलाव नहीं होगा। इससे एसी के इस्तेमाल में कम बिजली की जरूरत होगी। वेंटिलेशन को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
  • अंडरग्राउंड स्टेशनों पर मेट्रो के पहुंचने पर हवा का प्रभाव कम होगा।
  • स्वचालित ट्रेन संचालन से मोटरमैन या कंडक्टर की जरूरत नहीं होगी। 
  • पीएसडी से ध्वनि प्रदूषण कम होगा। इससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर होने वाली उद्घोषणाएं सुनने में भी दिक्कत नहीं होगी।
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