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दिल्ली: सिग्नेचर ब्रिज से कूदने से युवती की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पर पुलिस को कड़ी फटकार

Fri, 01 Oct 2021 05:59 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

महिला के लापता होने के बाद उसके पिता ने 24 जून 2021 को शिकायत दर्ज कराई थी और मामले में एक युवक आयुष पंवार के खिलाफ अपनी पुत्री को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। महिला का शव यमुना नदी से बरामद हुआ था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अदालत ने राजधानी में सिग्नेचर ब्रिज से कूदने के बाद एक युवती की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा बेटी को खोने के बाद वे मृतका के माता-पिता को हुए असहनीय दर्द को महसूस कर सकते हैं। अदालत ने यह टिप्पणी मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए की।

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महिला के लापता होने के बाद उसके पिता ने 24 जून 2021 को शिकायत दर्ज कराई थी और मामले में एक युवक आयुष पंवार के खिलाफ अपनी पुत्री को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। महिला का शव यमुना नदी से बरामद हुआ था। याची ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 15-16 दिनों तक थाने में जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने किया पीड़ित परिवार के दर्द का जिक्र
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुल वर्मा ने अपने 28 सितंबर के फैसले में आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कोई केवल उस पीड़ा और असहनीय पीड़ा की कल्पना कर सकता है जिससे वे पीड़ित होंगे। जिस दर्दनाक परीक्षा और पीड़ा से वे गुजरे और उसके बाद के प्रभावों से वे अभी भी जूझ रहे हैं, उसके लिए पूरे परिवार के लिए चिकित्सीय सत्रों से गुजरना अनिवार्य हो जाता है जिसमें परामर्श भी शामिल है।

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दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी जरूरी है- अदालत

अदालत ने केंद्रीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को परामर्श सत्र के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उदासीनता की कमी के साथ कर्तव्य की उपेक्षा और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून की अवज्ञा न केवल सख्त निंदा के योग्य है बल्कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी जरूरी है।

अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी इस तथ्य के आलोक में महत्वपूर्ण है कि संबंधित तारीख के सीसीटीवी फुटेज को पुनर्प्राप्त नहीं किया जा सका। अदालत ने कहा इस प्रकार यह स्पष्ट है कि प्राथमिकी दर्ज करने और उसके बाद जांच करने में देरी के कारण सबूत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खत्म हो गया। मामले के जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी इस कारण हुई कि मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पैशल सैल द्वारा की जा रही थी।

अदालत ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले में पारित कई आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रकार प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में जांच की कार्यवाही की शुरुआत नहीं होनी चाहिए,खासकर लापता व्यक्ति की शिकायत के संबंध में।
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