'द न्यू इंडियन' की संस्थापक एवं पत्रकार आरती टीकू ने उनके अकाउंट को लॉक करने के ट्विटर के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में तर्क रखा कि संविधान के तहत उसके अधिकारों का उल्लंघन किया गया है और ट्विटर उसके खाते को बंद करके इस्लामी आतंकवादियों का पक्ष ले रहा है। ऐसे में ट्विटर के फैसले को रद्द किया जाए।
टीकू ने अपने चचेरे भाई को जाने से मारने वाली धमकी और 'कश्मीरी इस्लामवादियों' की हरकतों को लेकर एक ट्वीट पोस्ट किया था। याचिका के अनुसार 14 दिसंबर, 2021 को टीकू के चचेरे भाई ने ट्विटर स्पेस चर्चा में भाग लिया जिसमें उसे 'भारतीय एजेंट' कहा गया और उनके खिलाफ अन्य आरोप लगाए गए हैं। उसके बाद अगले दिन उसने ट्वीट पोस्ट किया कि 'मेरे श्रीनगर में रहने वाले भाई को कश्मीर-भारत में बैठे जिहादी आतंकवादियों और पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका में उनके आकाओं द्वारा खुलेआम धमकाया जा रहा है। क्या कोई देख रहा है? क्या हम इस्लामवादियों द्वारा गोली मारने की प्रतीक्षा कर रहे हैं या आप उन पर कार्रवाई करेंगे?'
ट्वीट में उन्होंने 'इनोसेंट किलिंग्स बंद करो' शीर्षक वाले एक सत्र की एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग पोस्ट की थी जिसमें सदस्यों को साहिल टीकू आरती के भाई को निशाना बनाते हुए देखा गया है। साहिल श्रीनगर का रहने वाला है और भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू-कश्मीर इकाई का प्रवक्ता भी है।
याची ने कहा इस पोस्ट के बाद ट्विटर ने उसी दिन उनका अकाउंट लॉक कर दिया। टीकू ने ट्विटर पर अपने चचेरे भाई को दी गई धमकियों के टेप का जिक्र करते हुए याचिका में कहा है कि ट्विटर द्वारा उनके अकाउंट को लॉक करने की कार्रवाई अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन है, क्योंकि यह उनके बोलने के अधिकार का उल्लंघन है।
याची के अधिवक्ता ने कहा ट्विटर ने साहिल टीकू पर फैलाई गई नफरत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि नियमों के उल्लंघन के लिए आरती के ट्वीट को हटा दिया। बाद में 15 दिसंबर को, उनके खाते को आगे की पोस्ट करने से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था।